सऊदी अरब में हज यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर आई है। पवित्र स्थलों (Holy Sites) को अब और हरा-भरा बनाया जा रहा है ताकि वहां आने वाले मेहमानों को भीषण गर्मी से राहत मिल सके। पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने का काम पूरा किया है।

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पवित्र स्थलों में कितने पेड़ लगाए गए और क्या है पूरा हिसाब?

सऊदी अरब के पवित्र स्थलों में अब तक 60,000 से ज़्यादा पेड़ लगाए जा चुके हैं। इस काम को दो हिस्सों में पूरा किया गया है। पहले चरण में 20,000 पेड़ लगाए गए थे और हाल ही में 40,000 और पेड़ लगाए गए हैं। इस बड़ी मुहिम की वजह से पिछले हज सीजन के मुकाबले अब वहां की हरियाली तीन गुना बढ़ गई है। अधिकारियों ने ऐसे पौधों का चुनाव किया है जो वहां के स्थानीय मौसम और जलवायु को आसानी से झेल सकें।

इस प्रोजेक्ट को कौन संभाल रहा है और इसका फायदा क्या होगा?

इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी Kadana Development and Development Company को सौंपी गई है, जो Royal Commission for Makkah City and Holy Sites की एक सहायक कंपनी है। इस पहल का मकसद वातावरण को ठंडा करना और जलवायु में सुधार लाना है ताकि हज और उमराह पर आने वाले यात्रियों का अनुभव और आरामदायक हो सके। यह पूरा प्रोजेक्ट सऊदी विजन 2030 और सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव के लक्ष्यों के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण में संतुलन बनाए रखना है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

पवित्र स्थलों में कुल कितने पेड़ लगाए गए हैं?

अब तक कुल 60,000 से ज़्यादा पेड़ लगाए गए हैं, जिनमें 40,000 पेड़ हाल ही में और 20,000 पेड़ पहले चरण में लगाए गए थे।

इस प्रोजेक्ट से हज यात्रियों को क्या फायदा होगा?

ज़्यादा पेड़ लगने से वहां का तापमान कम होगा और वातावरण ठंडा रहेगा, जिससे यात्रियों को अपनी रस्मों के दौरान गर्मी से राहत मिलेगी।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.