Saudi Arabia के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan ने ईरान के साथ रिश्तों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि किसी भी तरह के आर्थिक सहयोग की बात करने से पहले ईरान के साथ भरोसे को फिर से बनाना होगा। यह बात उन्होंने Vienna में European Council on Foreign Relations (ECFR) के एक सेशन के दौरान कही।
अमेरिका और ईरान समझौते पर जताई उम्मीद
प्रिंस फैसल ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले समझौते (MOU) पर सकारात्मक सोच जताई है। उन्होंने कहा कि यह डील संघर्ष को खत्म करने और क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ाने में मदद कर सकती है। उनके मुताबिक, इस समझौते से सबसे बड़ा फायदा परमाणु मुद्दे (Nuclear issue) को सुलझाने में मिल सकता है।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि किसी भी समझौते की सफलता उसकी जांच (Verification) पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि एक ऐसा सिस्टम होना चाहिए जो लंबे समय तक काम करे और जिससे सभी देशों को भरोसा मिले।
ईरान के हमलों से टूटा भरोसा
रिश्तों में आई कड़वाहट का जिक्र करते हुए प्रिंस फैसल ने कहा कि ईरान ने सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं, बल्कि पूरे GCC देशों पर हमले किए थे। इन हमलों की वजह से देशों के बीच भरोसे का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि बीजिंग समझौते के बाद रिश्ते सुधरने लगे थे, लेकिन हालिया विवादों ने उस तरक्की को पीछे धकेल दिया है।
इन्वेस्टमेंट और PIF की प्राथमिकताएं
जब उनसे ईरान के लिए प्रस्तावित 300 अरब डॉलर के रिकंस्ट्रक्शन फंड के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने साफ़ किया कि सऊदी अरब का Public Investment Fund (PIF) फिलहाल देश के अंदरूनी प्रोजेक्ट्स और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।
उन्होंने बताया कि PIF की रणनीति पहले से तय है और उसका पैसा घरेलू विकास के लिए सुरक्षित है। किसी भी बाहरी निवेश का फैसला संबंधित आर्थिक मंत्रियों द्वारा लिया जाएगा, लेकिन आर्थिक सहयोग से पहले भरोसा बहाल करना पहली शर्त है।
हालिया बातचीत और कोशिशें
बता दें कि इससे पहले 15 जून 2026 को प्रिंस फैसल ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi से फोन पर बात की थी। उस दौरान उन्होंने सैन्य अभियानों को रोकने और बातचीत शुरू करने के फैसले का स्वागत किया था। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की भी सराहना की गई है।