मध्य पूर्व में शांति की कोशिशों के बीच सऊदी अरब और ईरान के विदेश मंत्रियों ने फोन पर महत्वपूर्ण चर्चा की है। प्रिंस फैसल बिन फरहान और अब्बास अराघची ने क्षेत्रीय हालातों को संभालने और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक संवाद पर सहमति जताई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी देशों में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य इलाके में हो रहे बदलावों को सही दिशा में लाना है।

सऊदी और ईरान के बीच बातचीत में क्या खास रहा?

9 अप्रैल 2026 को हुई इस कॉल में दोनों नेताओं ने मौजूदा क्षेत्रीय चुनौतियों पर बात की। इस दौरान कूटनीतिक कोशिशों को आगे बढ़ाने और हालातों को नियंत्रण में लाने पर जोर दिया गया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि चर्चा में द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के साथ-साथ क्षेत्रीय बदलावों पर ध्यान केंद्रित किया गया। वहीं सऊदी अरब के मीडिया के अनुसार, प्रिंस फैसल को उसी शाम अन्य पड़ोसी देशों जैसे कतर और यूएई से भी इसी तरह के कॉल आए थे ताकि स्थिति को काबू में रखा जा सके।

शांति बहाली के लिए उठाए गए कुछ बड़े कदम

  • ईरान और सऊदी अरब के बीच साल 2023 में कूटनीतिक रिश्ते करीब सात साल बाद दोबारा शुरू हुए थे।
  • चीन ने हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम में मध्यस्थता की बड़ी भूमिका निभाई है।
  • चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इस क्षेत्रीय शांति के मुद्दे पर विभिन्न देशों से करीब 26 बार बातचीत की है।
  • ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उसे युद्धविराम और इजराइल के समर्थन में से फैसला लेना होगा।

जानकारों का मानना है कि इस तरह के कूटनीतिक संवाद से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां चल रहे व्यापार पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। जब बड़े देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुला रहता है, तो क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों और अन्य विदेशियों के लिए भी माहौल सुरक्षित रहता है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.