सऊदी अरब ने 31 जुलाई 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि उनके द्वारा किए गए हवाई हमलों का निशाना इराकी जनता या सरकार नहीं थी। सऊदी विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने बताया कि यह कार्रवाई यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के साथ मिलकर की गई थी। उन्होंने कहा कि इराक की तरफ से सऊदी तेल केंद्रों पर ड्रोन हमले किए गए थे, जिसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा में यह कदम उठाया गया।
इराक की नाराजगी और घटना का असर
दूसरी तरफ इराक ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है। इराकी सरकार के प्रवक्ता हैदर अल-अबूदी ने कहा कि इराक को इन हमलों की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी और न ही उन्होंने अपनी जमीन का उपयोग किसी पड़ोसी देश के खिलाफ करने की अनुमति दी थी। इराक ने सऊदी अरब से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने की मांग की है।
इस तनावपूर्ण स्थिति के कारण इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी की प्रस्तावित सऊदी अरब यात्रा को फिलहाल टाल दिया गया है। पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) ने दावा किया है कि इस हमले में उनके 20 सदस्य मारे गए हैं और 32 लोग घायल हुए हैं, जो सात अलग-अलग प्रांतों में हुए हैं। वहीं ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, हमले में मारे गए उनके 5 रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के शवों को वापस लाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों को इराकी सरकार के साथ समन्वय में होने की बात कही थी, लेकिन इराकी अधिकारियों ने इस दावे को पूरी तरह से नकार दिया है।
