सऊदी अरब पर 27 और 28 जुलाई 2026 को इराक की तरफ से कई ड्रोन हमले किए गए। इन हमलों में रियाद और पूर्वी प्रांत में स्थित Abqaiq की तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। पिछले 72 घंटों के भीतर ईरान समर्थित मिलिशिया ने सऊदी और अमेरिकी ठिकानों पर 30 से ज्यादा ड्रोन हमले किए हैं। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है।
सऊदी और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई
सऊदी सशस्त्र बलों ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के साथ मिलकर इराक के पूर्वी इलाकों में सटीक सैन्य कार्रवाई की। यह ऑपरेशन 28 और 29 जुलाई को चलाया गया, जिसका मुख्य मकसद मिलिशिया के उन ठिकानों और हथियारों को नष्ट करना था जो सऊदी सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए थे। सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने साफ किया कि सऊदी अरब अपनी सुरक्षा के लिए अपनी रक्षा का पूरा अधिकार रखता है और इस कार्रवाई का मकसद तनाव बढ़ाना नहीं बल्कि हमले का जवाब देना है।
हमले का असर और इराक की प्रतिक्रिया
CENTCOM ने पुष्टि की है कि सऊदी और अमेरिकी फाइटर जेट्स ने मिलकर आतंकवादी रसद और हथियारों के ठिकानों पर हमला किया। इस ऑपरेशन में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर इन हमलों को निर्देश देने का आरोप लगाया गया है। Popular Mobilization Forces (PMF) की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक इस कार्रवाई में उनके 20 लड़ाके और 6 ईरानी सलाहकार मारे गए हैं, जबकि 32 लोग घायल हुए हैं। इराक की सरकार ने इस संयुक्त हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है, जबकि सऊदी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने लंबे समय तक संयम बरता और राजनयिक कोशिशों के विफल होने के बाद ही यह कदम उठाया।
