अगर आप सऊदी अरब में काम करने वाले प्रवासी (Expat) हैं, तो आपने वहां के बैंकों में कुछ अलग चीजें देखी होंगी. वहां Murabaha, Takaful और Sharia-compliant जैसे शब्द आम हैं. सऊदी सेंट्रल बैंक (SAMA) के नियमों के अनुसार, इस्लामिक फाइनेंस में ब्याज (Interest) का लेन-देन नहीं होता है. इसका सीधा असर आपके बैंक खाते, कार फाइनेंस और पर्सनल लोन पर पड़ता है.

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इस्लामिक फाइनेंस और आम बैंकिंग में क्या अंतर है

इस्लामिक फाइनेंस पूरी तरह से शरिया नियमों पर आधारित है. इसमें आम बैंकों की तरह लोन पर ब्याज (Riba) नहीं लिया जाता. इसकी जगह बैंक किसी संपत्ति (जैसे कार या घर) को खरीदकर अपना प्रॉफिट मार्जिन जोड़कर ग्राहक को किस्तों में बेचते हैं. इस प्रक्रिया को Murabaha कहते हैं. सऊदी अरब में Al Rajhi और Alinma जैसे बड़े इस्लामिक बैंक हैं, जबकि SNB और Riyad Bank जैसे बैंक दोनों तरह की सुविधा देते हैं.

  • Murabaha: पर्सनल और कार फाइनेंस का सबसे आम तरीका.
  • Takaful: यह इस्लामिक इंश्योरेंस है, जो आम इंश्योरेंस की जगह लेता है.
  • Ijara: इसमें बैंक संपत्ति का मालिक होता है और उसे लीज पर देता है.
  • Mudaraba: सेविंग अकाउंट में फिक्स ब्याज के बजाय प्रॉफिट शेयरिंग होती है.

प्रवासियों को लोन के लिए किन चीज़ों की ज़रूरत होती है

अगर कोई भारतीय या अन्य प्रवासी सऊदी अरब में पर्सनल लोन या कार फाइनेंस लेना चाहता है, तो उसे कुछ खास शर्तें पूरी करनी होती हैं. ज़्यादातर शरिया-कम्प्लायंट लोन के लिए सैलरी ट्रांसफर अनिवार्य होता है.

  • न्यूनतम सैलरी: कंपनी के हिसाब से कम से कम 3,000 से 5,000 सऊदी रियाल (SAR) सैलरी होनी चाहिए.
  • सैलरी ट्रांसफर: जिस बैंक से फाइनेंस ले रहे हैं, उसमें सैलरी आना ज़रूरी है.
  • एंड-ऑफ-सर्विस बेनिफिट (ESB): कई बैंक प्रवासियों के ESB को सिक्योरिटी के तौर पर इस्तेमाल करते हैं.
  • लेट पेमेंट पेनल्टी: लेट फीस पर लगने वाला जुर्माना दान (Charity) में जाता है, उस पर चक्रवृद्धि ब्याज (Compound interest) नहीं लगता.

हाल ही में हुए SAMA के नए बदलाव

सऊदी सेंट्रल बैंक (SAMA) ने प्रवासियों और आम लोगों की सुविधा के लिए ओपन बैंकिंग के दूसरे चरण की शुरुआत की है. अब प्रवासी अपने बैंकिंग डेटा को सुरक्षित तरीके से फिनटेक ऐप (जैसे Tamara, Tabby और Lendo) के साथ शेयर कर सकते हैं. इसके अलावा, प्रवासियों के वाहन रजिस्ट्रेशन के लिए डिजिटल Takaful (इंश्योरेंस) को जोड़ना अनिवार्य किया जा रहा है. साथ ही बैंकों को अब अपने विज्ञापनों में APR के साथ-साथ Effective Profit Rate दिखाना अनिवार्य किया गया है ताकि लोग आसानी से सही फाइनेंस चुन सकें.

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.