सऊदी अरब के जेद्दा शहर में हाल ही में GCC देशों का एक बड़ा शिखर सम्मेलन हुआ। इस बैठक की अध्यक्षता क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने की। इस समिट के बाद अरब पार्लियामेंट ने सऊदी अरब की काफी तारीफ की है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब खाड़ी देशों को एक साथ लाने और अरब देशों के मुद्दों को दुनिया के सामने उठाने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है।

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जेद्दा समिट में किन बातों पर हुई चर्चा और सऊदी की तारीफ क्यों हुई?

अरब पार्लियामेंट के अध्यक्ष मोहम्मद बिन अहमद अल यमाही ने सऊदी अरब द्वारा जेद्दा समिट की मेजबानी करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब खाड़ी देशों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने और अरब देशों के साझा हितों की रक्षा करने के लिए लगातार मेहनत कर रहा है। इस दौरान सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुलअजीज और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व की तारीफ की गई।

इस बैठक में GCC देशों के कई बड़े नेता शामिल हुए, जिनमें शामिल थे:

  • बहरीन: राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा
  • कतर: अमीर शेख तमीम बिन हमद अल ثاني
  • कुवैत: क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल खालिद अल हमद अल सबाह
  • UAE: शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान (विदेश मंत्री)

ईरान के हमलों और सुरक्षा को लेकर क्या रुख अपनाया गया?

इस शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर चर्चा हुई। GCC महासचिव जासिम मोहम्मद अल बुदईवी ने बताया कि नेताओं ने ईरान द्वारा GCC देशों और जॉर्डन पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की। इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बताया गया। अरब पार्लियामेंट ने यह साफ किया कि प्रभावित देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार है।

इसके अलावा, समिट में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया। यह कहा गया कि अगर यहाँ व्यापार रुकता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ेगा, जिसे किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जा सकता।

Frequently Asked Questions (FAQs)

जेद्दा समिट कब और कहाँ आयोजित की गई थी?

यह समिट मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को सऊदी अरब के जेद्दा शहर में आयोजित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने की थी।

अरब पार्लियामेंट ने सुरक्षा को लेकर क्या कहा?

पार्लियामेंट ने ईरान के हमलों की निंदा की और कहा कि देशों को अपनी संप्रभुता की रक्षा करने का पूरा हक है। साथ ही उन्होंने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा को जरूरी बताया।