यरूशलेम में 14 मई 2026 को तनाव काफी बढ़ गया जब इसराइली अधिकारियों ने अल-अक्सा मस्जिद में प्रवेश किया। इस घटना के बाद सऊदी अरब ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है और साफ कहा है कि वह पवित्र स्थलों की कानूनी और ऐतिहासिक स्थिति के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं करेगा। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप करने की मांग की है।

यरूशलेम में असल में हुआ क्या था?

14 मई 2026 को, जिसे हिब्रू कैलेंडर में यरूशलेम एकीकरण दिवस के रूप में देखा जाता है, वहां कई विवादित घटनाएँ हुईं। इसराइली सुरक्षा बलों की निगरानी में बसने वाले लोगों ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर में प्रवेश किया और वहां धार्मिक रस्में निभाईं। सबसे ज्यादा विवाद तब हुआ जब इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir ने मस्जिद के आंगन में इसराइली झंडा फहराया। इसके अलावा, ओल्ड सिटी में हजारों राष्ट्रवादी लोगों ने ‘फ्लैग मार्च’ निकाला, जिसके कारण सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर रहीं और शहर में कई जगह बंदी लागू कर दी गई।

सऊदी अरब और अन्य देशों का क्या कहना है?

  • सऊदी अरब: सऊदी विदेश मंत्रालय ने इसराइली अधिकारियों की इन हरकतों की निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश की स्थापना होनी चाहिए जिसकी राजधानी पूर्वी यरूशलेम हो।
  • मिस्र: मिस्र ने इस घटना को खतरनाक बताया और कहा कि पूर्वी यरूशलेम कब्जाया हुआ फिलिस्तीनी इलाका है।
  • अरब लीग: अरब देशों के समूह ने फिलिस्तीनियों के साथ हो रहे ऐतिहासिक अन्याय को खत्म करने की मांग की।
  • फिलिस्तीनी अधिकारी: राष्ट्रपति महमूद अब्बास और PLO ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल की इन हरकतों को रोकने की अपील की।

इसराइल का इस पूरे मामले पर क्या स्टैंड है?

दूसरी ओर, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा कि यरूशलेम हमेशा इसराइल की ऐतिहासिक और अनंत राजधानी बना रहेगा। फिलिस्तीनी विश्लेषकों का मानना है कि इसराइली सरकार इन कदमों के जरिए शहर के स्वरूप को बदलने और वहां अपना राजनीतिक दबदबा बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इस तनाव के कारण इलाके में नए विद्रोह की आशंका भी जताई जा रही है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सऊदी अरब ने इसराइल की किस बात पर आपत्ति जताई है?

सऊदी अरब ने इसराइली अधिकारियों द्वारा अल-अक्सा मस्जिद में प्रवेश करने और वहां इसराइली झंडा फहराने पर कड़ी आपत्ति जताई है।

इस मामले पर बेंजामिन नेतन्याहू ने क्या कहा?

इसराइली प्रधानमंत्री ने कहा कि यरूशलेम इसराइल की ऐतिहासिक और स्थायी राजधानी रहेगी।