सऊदी अरब ने दुनिया भर में हवाई यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सऊदी प्रेस एजेंसी (SPAENG) ने जानकारी दी कि सऊदी अरब अब बीजिंग कन्वेंशन का हिस्सा बन गया है। इस फैसले का मकसद आसमान में उड़ने वाले विमानों की सुरक्षा को और पुख्ता करना है ताकि यात्री बिना किसी डर के सफर कर सकें।

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बीजिंग कन्वेंशन क्या है और इससे सुरक्षा कैसे बढ़ेगी?

बीजिंग कन्वेंशन असल में 2010 में बना एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसे इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) की देखरेख में तैयार किया गया था। यह कानून हवाई जहाजों के खिलाफ होने वाले आतंकी हमलों को रोकने के लिए बनाया गया है। इसके तहत कई सख्त नियम तय किए गए हैं:

  • हथियार के तौर पर इस्तेमाल: विमानों का इस्तेमाल किसी हथियार की तरह करना अब गंभीर अपराध होगा।
  • खतरनाक सामान: हवाई जहाजों या जमीन पर मौजूद ठिकानों पर खतरनाक सामग्री से हमला करना मना होगा।
  • अवैध परिवहन: बायोलॉजिकल, केमिकल या परमाणु हथियारों को अवैध तरीके से ले जाना जुर्म माना जाएगा।
  • साजिश और फंडिंग: आतंकवाद के लिए पैसे जुटाना, साजिश रचना या इसे बढ़ावा देना भी इस कानून के दायरे में आएगा।

सऊदी अरब और चीन के बीच सुरक्षा पर क्या चर्चा हुई?

इस समझौते से पहले 20 अप्रैल 2026 को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच फोन पर बातचीत हुई। इस कॉल में दोनों नेताओं ने इलाके में शांति, सुरक्षा और समुद्री रास्तों की स्थिरता बढ़ाने पर चर्चा की। इससे पहले फरवरी 2024 में भी दोनों देशों ने हवाई परिवहन को बेहतर बनाने के लिए एक समझौता (MoU) किया था।

सऊदी अरब का लक्ष्य 2030 तक खुद को एक ग्लोबल लॉजिस्टिक्स हब बनाना है। इसी विजन के तहत सऊदी सरकार लगातार हवाई सुरक्षा और नियमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कर रही है ताकि दुनिया भर से आने वाले यात्रियों और सामान की आवाजाही सुरक्षित रहे।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com