भारत की एक बड़ी पहल को अब सऊदी अरब का साथ मिला है। सऊदी अरब जल्द ही ‘इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस’ (IBCA) का 26वां सदस्य बनने जा रहा है। भारत के पर्यावरण मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, सऊदी अरब ने इस गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। इससे पूरी दुनिया में वन्यजीवों के संरक्षण और पर्यावरण को बचाने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) क्या है और इसका क्या लक्ष्य है?

IBCA एक वैश्विक पहल है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2023 में प्रोजेक्ट टाइगर की 50वीं सालगिरह के दौरान शुरू किया था। इसका मुख्य काम दुनिया की सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों को बचाना और उनके रहने की जगह को सुरक्षित करना है।

  • शामिल प्रजातियां: बाघ (Tiger), शेर (Lion), तेंदुआ (Leopard), हिम तेंदुआ (Snow Leopard), चीता (Cheetah), जगुआर (Jaguar) और प्यूमा (Puma)
  • मुख्यालय: इसका मुख्य कार्यालय नई दिल्ली, भारत में स्थित है।
  • बजट: भारत सरकार ने 2023-24 से 2027-28 तक के पांच साल के लिए 150 करोड़ रुपये की मदद दी है।
  • नियम: संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश इसमें शामिल हो सकते हैं। इसमें शामिल होने के लिए कोई फीस नहीं देनी होती है।

सऊदी अरब की एंट्री और आने वाला बड़ा सम्मेलन

सऊदी अरब के शामिल होने से अब इस गठबंधन में सदस्यों की संख्या 26 हो जाएगी। इससे पहले इसमें भारत, रूस, नेपाल और बांग्लादेश समेत 25 देश शामिल थे। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 6 मई 2026 को सभी देशों से इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने की अपील की थी ताकि वन्यजीवों के लिए एक मजबूत टीम बनाई जा सके।

  • पहला शिखर सम्मेलन: 1 से 2 जून 2026 को नई दिल्ली में पहला IBCA समिट आयोजित किया जाएगा।
  • दिल्ली घोषणापत्र: इस समिट में ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’ अपनाया जाएगा, जो बिग कैट संरक्षण पर दुनिया का पहला ग्लोबल घोषणापत्र होगा।
  • सहयोग: इस मिशन में UNDP, IUCN और WWF जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत का साथ दे रही हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) में कौन से जानवर शामिल हैं?

इसमें दुनिया की सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों को शामिल किया गया है, जिनमें बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा आते हैं।

IBCA का पहला शिखर सम्मेलन कब और कहां होगा?

IBCA का पहला शिखर सम्मेलन 1 से 2 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होगा, जहां ‘दिल्ली घोषणापत्र’ को अपनाया जाएगा।