सऊदी अरब में इस साल की हज यात्रा आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है और 25 मई 2026 तक 15 लाख से ज्यादा विदेशी जायरीन मक्का पहुंच चुके हैं। हज यात्रा के केंद्र में पवित्र काबा है, जिसे हर साल एक बेहद खूबसूरत काले रंग के रेशमी गिलाफ से ढका जाता है। इस गिलाफ को ‘किसवा’ (Kiswah) कहा जाता है। दुनिया भर के लोगों में हमेशा यह जानने की उत्सुकता रहती है कि पवित्र काबा के अंदर आखिर क्या है और इस गिलाफ को बनाने में कितना खर्च आता है। सऊदी अरब की सरकारी अथॉरिटी ने इसके बारे में पूरी जानकारी साझा की है।
काबा के अंदर क्या है? जानिए अंदर का नजारा कैसा दिखता है
पवित्र काबा के अंदर का हिस्सा बेहद सादा और शांत है। इसके फर्श और दीवारों पर खास किस्म का संगमरमर (marble) लगा हुआ है। फर्श पर सफेद रंग का संगमरमर है जिसके किनारों पर काले रंग की पट्टी बनी है। वहीं, अंदर की दीवारों पर चार मीटर की ऊंचाई तक हल्के गुलाबी रंग का संगमरमर लगा हुआ है। इसके ऊपर छत तक हरे रंग का कपड़ा लगा है जिस पर सोने की कढ़ाई से कुरान की आयतें लिखी हुई हैं।
काबा की छत को सहारा देने के लिए अंदर तीन लकड़ी के मजबूत खंभे बने हैं, जिनकी ऊंचाई लगभग 9 मीटर है। छत से खूबसूरत लालटेन और लोबान जलाने वाले चांदी के बर्तन लटके हुए हैं। इसके अलावा अंदर एक बड़ा संदूक रखा हुआ है, जिसमें काबा को साफ करने के बाद दीवारों पर खुशबू लगाने के लिए खास ऊद का तेल और ताइफ गुलाब का तेल सुरक्षित रखा जाता है। काबा के अंदर कोई भी मूर्ति, तस्वीर, सजावटी सामान या फर्नीचर नहीं रखा गया है। अंदर एक सीढ़ी भी मौजूद है जिसे ‘बाब अल-तौबा’ (तौबा का दरवाजा) कहा जाता है, जो छत की तरफ जाती है।
काबा का गिलाफ (Kiswah) कैसे बनता है और इस पर कितना खर्च आता है?
काबा को ढकने वाले गिलाफ यानी किसवा को तैयार करने में भारी मात्रा में कीमती चीजों का इस्तेमाल होता है। इसे बनाने में लगभग 670 किलोग्राम कच्चा सिल्क इस्तेमाल होता है, जिसे इटली से मंगाया जाता है और 22 घंटे तक काले रंग में रंगा जाता है। इस रेशमी गिलाफ पर पवित्र कुरान की आयतों की कढ़ाई करने के लिए लगभग 120 किलोग्राम 21-कैरेट सोने के धागे और 100 किलोग्राम चांदी के धागों का उपयोग किया जाता है।
तैयार होने के बाद इस पूरे गिलाफ का कुल वजन लगभग 1,415 किलोग्राम होता है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, इस एक गिलाफ को बनाने में 2.5 करोड़ सऊदी रियाल से भी ज्यादा का खर्च आता है। इसे मक्का के उम अल-जौद इलाके में स्थित ‘किंग अब्दुलअजीज कॉम्प्लेक्स’ में तैयार किया जाता है, जहां करीब 200 कुशल कारीगर, दर्जी और डिजाइनर काम करते हैं। एक नए गिलाफ को तैयार करने में लगभग 10 महीने का समय लगता है।
गिलाफ बदलने के नियम और हालिया बदलाव क्या हैं?
सऊदी सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक, हर साल इस्लामिक नए साल के पहले दिन यानी 1 मुहर्रम को पुराना गिलाफ हटाकर नया गिलाफ चढ़ाया जाता है। वर्ष 1448 हिजरी के लिए नया गिलाफ 25 मई 2026 तक पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। इससे पहले, हज यात्रियों की सुरक्षा और गिलाफ को नुकसान से बचाने के लिए 18 अप्रैल 2026 को गिलाफ के निचले हिस्से को जमीन से 3 मीटर ऊपर उठा दिया गया था, जो कि हर साल तवाफ के दौरान किया जाने वाला एक सामान्य सुरक्षा नियम है। गिलाफ बदलने का पूरा काम मस्जिद अल-हरम के मैनेजमेंट और काबा के पारंपरिक संरक्षक अल-शैबी परिवार की देखरेख में पूरा होता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
काबा के गिलाफ (Kiswah) को बनाने में कितना खर्च और सामग्री लगती है?
काबा के गिलाफ को बनाने में 2.5 करोड़ सऊदी रियाल से ज्यादा का खर्च आता है। इसमें लगभग 670 किलो सिल्क, 120 किलो सोना और 100 किलो चांदी के धागे इस्तेमाल होते हैं।
काबा के अंदर क्या कोई मूर्ति या चित्र मौजूद है?
नहीं, काबा के अंदर कोई मूर्ति, तस्वीर, सजावटी सामान या फर्नीचर नहीं है। वहां केवल संगमरमर की दीवारें, तीन लकड़ी के खंभे, लटकते लैंप और खुशबूदार तेल रखने का संदूक मौजूद है।
काबा का गिलाफ हर साल कब बदला जाता है?
काबा का गिलाफ हर साल इस्लामिक नए साल के पहले दिन यानी 1 मुहर्रम को बदला जाता है। इसे बदलने का काम मस्जिद अल-हरम की कमेटी और पारंपरिक संरक्षक अल-शैबी परिवार करता है।