सऊदी अरब अपनी रेत और रेगिस्तानों के लिए जाना जाता है, लेकिन यहाँ ज्वालामुखियों का भी एक बड़ा इतिहास रहा है. हाल ही में सऊदी जियोलॉजिकल सर्वे ने बताया कि इस इलाके में आखिरी बार ज्वालामुखी कब फटा था. यह घटना सदियों पहले मदीना शहर के पास घटी थी, जिसकी पूरी जानकारी अब सामने आई है.

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आखिरी बार कब और कहाँ फटा था ज्वालामुखी?

सऊदी अरब के अरब प्रायद्वीप में आखिरी ज्वालामुखी विस्फोट साल 654 हिजरी में हुआ था, जो अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से 1256 ईस्वी का समय था. यह विस्फोट मदीना के दक्षिण में स्थित हरात राहात (Harrat Rahat) के उत्तरी हिस्से में हुआ था. उस समय निकला लावा मदीना शहर के करीब 20 किलोमीटर तक फैल गया था.

क्या अब भी कोई खतरा है?

सऊदी जियोलॉजिकल सर्वे के सीनियर डायरेक्टर तुर्की एस्साम अल-सेहली ने बताया कि सऊदी अरब में पिछले कई सदियों से ज्वालामुखी के मामले में स्थिरता बनी हुई है. हालांकि कुछ इलाके अभी भी संभावित रूप से सक्रिय माने जाते हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि घबराने की कोई बात नहीं है और फिलहाल खतरे के कोई संकेत नहीं हैं. सरकार ने भूकंप और ज्वालामुखी की निगरानी के लिए एक आधुनिक सिस्टम लगाया हुआ है, जो किसी भी बदलाव पर लगातार नजर रखता है.

ज्वालामुखी विस्फोट से जुड़ी अहम जानकारियां

विवरण जानकारी
आखिरी विस्फोट का समय 1256 ईस्वी (654 हिजरी)
विस्फोट की जगह हरात राहात, मदीना के दक्षिण में
लावा का कुल फैलाव 23 किलोमीटर
मस्जिद-ए-नबवी से दूरी 8.2 किलोमीटर
निकाले गए लावा की मात्रा 0.5 क्यूबिक किलोमीटर
कुल ज्वालामुखी क्षेत्र (Al-Harrat) 90,000 वर्ग किलोमीटर
हरात राहात का क्षेत्रफल 20,000 वर्ग किलोमीटर
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.