सऊदी अरब ने एक अनोखी पहल शुरू की है जिसके तहत अब ऊंटों को भी पासपोर्ट जारी किया जाएगा। पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय ने मंगलवार को इस योजना का उद्घाटन किया है। इसका मकसद ऊंटों की पहचान, उनके मालिकों का रिकॉर्ड और उनकी सेहत से जुड़ी जानकारी को एक जगह जमा करना है। यह कदम देश में पशुधन क्षेत्र को व्यवस्थित करने के लिए उठाया गया है।

क्यों जरूरी है यह पासपोर्ट?

सरकार का कहना है कि इस पासपोर्ट से ऊंटों के व्यापार में काफी मदद मिलेगी। जब किसी ऊंट का पूरा रिकॉर्ड एक ही दस्तावेज में होगा तो उसे खरीदना और बेचना आसान हो जाएगा। इससे ऊंट के मालिक का अधिकार सुरक्षित रहेगा और चोरी या विवाद की स्थिति में असली मालिक की पहचान हो सकेगी। नीलामियों में ऊंट की कीमत उसकी नस्ल और सेहत के आधार पर सही तरीके से तय की जा सकेगी। इससे बाजार में पारदर्शिता आएगी और पुरानी व्यवस्था में सुधार होगा।

पासपोर्ट में क्या-क्या जानकारी होगी?

इस पासपोर्ट में ऊंट से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी ताकि उसकी पहचान पक्की हो सके। इसमें निम्नलिखित विवरण शामिल होंगे:

  • माइक्रोचिप नंबर: ऊंट की डिजिटल पहचान के लिए।
  • पासपोर्ट नंबर: एक यूनिक नंबर जो हर पासपोर्ट पर होगा।
  • निजी जानकारी: ऊंट का नाम, जन्म की तारीख, नस्ल, लिंग और रंग।
  • तस्वीरें: ऊंट की दोनों तरफ की फोटो।
  • मेडिकल रिकॉर्ड: टीकाकरण की जानकारी जिसे पशु चिकित्सक द्वारा प्रमाणित किया जाएगा।

22 लाख ऊंटों का डेटा होगा तैयार

सऊदी अरब में मौजूदा समय में करीब 22 लाख ऊंट हैं। इस नए सिस्टम से इन सभी का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा। यह कदम राष्ट्रीय पशुधन और मत्स्य विकास कार्यक्रम के तहत उठाया गया है। इससे बीमार ऊंटों का इलाज और उनकी देखभाल बेहतर तरीके से हो सकेगी। साथ ही, नस्ल सुधार और वेटरनरी सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.