सऊदी अरब ने ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। देश में पहले हाइड्रोजन से चलने वाले और खुद से चलने वाले यानी सेल्फ-ड्राइविंग हैवी-ड्यूटी ट्रक का उद्घाटन किया गया है। जनरल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (TGA) ने ऊर्जा मंत्रालय और परिवहन व लॉजिस्टिक्स मंत्रालय के सहयोग से 4 जून 2026 को इस आधुनिक ट्रक की शुरुआत की है। इस नई तकनीक के आने से पर्यावरण को सुरक्षित रखने और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने में काफी मदद मिलेगी।

इस हाइड्रोजन ट्रक की क्या हैं खास बातें और फीचर्स?

इस नए और आधुनिक ट्रक में कई ऐसी खूबियां दी गई हैं जो भारी सामान को आसानी से और सुरक्षित तरीके से लाने-ले जाने में मदद करेंगी:

  • लंबी दूरी की रेंज: यह ट्रक एक बार ईंधन भरने के बाद लगभग 1500 किलोमीटर तक का सफर आसानी से तय कर सकता है।
  • तेजी से ईंधन भरना: पारंपरिक इलेक्ट्रिक वाहनों की तरह चार्जिंग में घंटों बिताने के बजाय इस हाइड्रोजन ट्रक को केवल कुछ ही मिनटों में दोबारा रीफ्यूल किया जा सकता है।
  • प्रदूषण मुक्त सफर: यह ट्रक ईंधन के रूप में पूरी तरह से हाइड्रोजन का इस्तेमाल करता है, जिससे हवा में कोई भी हानिकारक गैस या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है।
  • स्मार्ट सेल्फ-ड्राइविंग सिस्टम: इसमें मल्टी-लेवल ऑटोनॉमस ड्राइविंग टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया है जो सुरक्षा को मजबूत बनाते हैं।

सऊदी विजन 2030 और सहयोगी पार्टनर

सऊदी अरब को दुनिया का एक बड़ा लॉजिस्टिक्स हब बनाने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है जो विजन 2030 के लक्ष्यों का हिस्सा है। इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में कई बड़ी सरकारी और निजी संस्थाओं ने मिलकर काम किया है। इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने में जनरल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (TGA) के साथ इस्माइल अबू दाऊद कंपनी (Ismail Abu Dawood Company), प्रॉक्टर एंड गैंबल लिमिटेड (Procter & Gamble Limited) और हाइपरव्यू कंपनी (Hyperview Company) शामिल हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सऊदी अरब के इस नए हाइड्रोजन ट्रक की रेंज कितनी है?

यह ट्रक एक बार ईंधन भरने के बाद लगभग 1500 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकता है और इसे रीफ्यूल होने में केवल कुछ मिनट का समय लगता है।

इस सेल्फ-ड्राइविंग ट्रक प्रोजेक्ट में कौन-कौन से विभाग शामिल हैं?

इस प्रोजेक्ट को जनरल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने स्पॉन्सर किया है, जिसे ऊर्जा मंत्रालय और परिवहन व लॉजिस्टिक्स मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है।