मदीना की मस्जिद-ए-नबवी में आने वाले ज़ायरीन और नमाज़ियों की सुविधा के लिए सऊदी सरकार ने बड़े इंतज़ाम किए हैं। भीड़ को सही तरीके से मैनेज करने के लिए अब AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जा रहा है। इसका मकसद यह है कि हर कोई बिना किसी परेशानी के इबादत कर सके और सुरक्षा बनी रहे।

भीड़ को कंट्रोल करने के लिए कौन से स्मार्ट सिस्टम इस्तेमाल हो रहे हैं?

सऊदी अरब ने स्मार्ट मस्जिद सिस्टम चालू किया है। इसमें AI वाले CCTV कैमरे और हीट मैपिंग तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे अधिकारियों को रीयल टाइम में पता चलता है कि किस जगह भीड़ ज़्यादा है। इसके अलावा, गेट पर एक डिजिटल लाइट सिस्टम लगाया गया है। इसमें हरा रंग मतलब जगह खाली है और लाल रंग का मतलब है कि क्षमता पूरी हो चुकी है, जिससे नमाज़ियों को दूसरे खाली हिस्से में भेजा जा सके।

ज़ायरीन के लिए क्या नियम और सुविधाएँ लागू हैं?

अब मस्जिद-ए-नबवी और रौदा शरीफ़ में दाखिल होने के लिए Nusuk ऐप पर डिजिटल परमिट होना ज़रूरी है। गर्मी से बचाने के लिए मस्जिद के आंगन में बड़े रिट्रैक्टेबल छाते और मिस्ट स्प्रे वाले पंखे लगाए गए हैं। साथ ही, भीड़ कम करने के लिए लोगों को निजी गाड़ियों के बजाय हरमैन हाई-स्पीड रेलवे का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है ताकि सड़कों पर जाम न लगे।

इन इंतज़ामों की ज़िम्मेदारी किन संस्थाओं की है?

इन सभी व्यवस्थाओं का संचालन जनरल अथॉरिटी फॉर द केयर ऑफ द अफेयर्स ऑफ द ग्रैंड मस्जिद एंड द प्रॉफिट्स मस्जिद और हज एवं उमराह मंत्रालय कर रहे हैं। इन संस्थाओं ने मिलकर एक ऐसा सिस्टम बनाया है जिससे लाखों लोगों की आवाजाही को आसान बनाया जा सके। मदीना मस्जिद में रीयल टाइम ऑक्यूपेंसी सर्विस भी शुरू की गई है, जो चार अलग-अलग रंगों के ज़रिए बताती है कि कौन सा इलाका कितना भरा हुआ है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या मदीना की मस्जिद में जाने के लिए परमिट ज़रूरी है?

हाँ, रौदा शरीफ़ और मस्जिद के खास हिस्सों में जाने के लिए Nusuk ऐप के ज़रिए डिजिटल परमिट लेना अनिवार्य है।

भीड़ का पता कैसे चलेगा?

मस्जिद एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चला रही है जिसमें चार रंगों (हरा, पीला, लाल और ग्रे) के ज़रिए बताया जाता है कि किस हिस्से में कितनी जगह खाली है।