सऊदी अरब में रहने वाले प्रवासियों के लिए एक बड़ी खबर है। सऊदी अरब की स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health) ने मेडिकल टेस्ट की जांच के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। अब विदेशी कामगारों के मेडिकल टेस्ट की बारीकी से जांच होगी ताकि कोई गड़बड़ी न हो सके। यह कदम उन सभी प्रवासियों के लिए जरूरी है जो अपना इकामा (Iqama) बनवाना या रिन्यू कराना चाहते हैं।
मेडिकल टेस्ट की जांच क्यों हो रही है
यह अभियान 7 और 8 जून 2026 के आसपास शुरू किया गया। सरकार चाहती है कि मेडिकल टेस्ट के नतीजे एकदम सही हों और स्वास्थ्य नियमों का पूरी तरह पालन हो ताकि आम जनता की सेहत को कोई खतरा न हो। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी ऐसे ही अभियान चलाए गए थे, जिसमें फूड वर्कर्स और अन्य प्रवासियों की स्क्रीनिंग करने वाले सेंटर्स को निशाने पर लिया गया था।
नियम क्या हैं और क्या चेक किया जाएगा
जांच के दौरान स्वास्थ्य केंद्रों में कई चीजों को देखा जाएगा। इसमें लैब के उपकरणों की सही हालत और उनके रखरखाव की जांच शामिल है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि काम करने वाला स्टाफ काबिल है या नहीं। सरकार ने साफ किया है कि बिना असल मेडिकल टेस्ट किए कोई भी हेल्थ सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जा सकता। सभी संक्रामक बीमारियों की जानकारी तय सरकारी प्लेटफॉर्म पर देना अनिवार्य है।
नियम तोड़ने पर कितनी बड़ी होगी सजा
अगर कोई स्वास्थ्य केंद्र नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। उल्लंघन करने वालों पर 1 लाख सऊदी रियाल तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, सेंटर को 60 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर बंद किया जा सकता है या उसका ऑपरेटिंग लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है।
प्रवासियों और भारतीयों पर क्या होगा असर
सऊदी अरब में काम करने वाले भारतीय भाइयों के लिए यह जानना जरूरी है कि उनका मेडिकल टेस्ट अब और भी पारदर्शी होगा। इससे फर्जी सर्टिफिकेट का खेल खत्म होगा और स्वास्थ्य सेवाओं की क्वालिटी बेहतर होगी। इस पूरी प्रक्रिया में स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ पासपोर्ट विभाग (General Directorate of Passports) और मानव संसाधन मंत्रालय भी जुड़े हुए हैं, ताकि प्रवासियों की योग्यता और सेहत की सही जांच हो सके।
