सऊदी अरब में काम करने वाले लाखों प्रवासियों और स्थानीय नागरिकों के लिए सरकार ने वेतन सुरक्षा (Wage Protection) को लेकर बहुत बड़े बदलाव किए हैं। मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय (MHRSD) ने साफ कर दिया है कि अब सैलरी में देरी या कटौती किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नए नियमों के तहत, अगर कोई कंपनी या नियोक्ता (कफील) समय पर पैसा नहीं देता है, तो सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से कार्रवाई शुरू कर देगा। यह कदम प्रवासियों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है।

सैलरी लेट होने पर कंपनी पर क्या कार्रवाई होगी?

सऊदी अरब में अब ‘मुदाद’ (Mudad) और ‘मुसानेद’ (Musaned) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सीधे कंपनियों पर नजर रख रहे हैं। अगर किसी कर्मचारी की सैलरी तय तारीख पर नहीं आती है, तो सरकार तुरंत एक्शन ले रही है। 10 दिन की देरी होने पर सिस्टम कंपनी को चेतावनी भेजता है और 20 दिन बाद सरकारी निरीक्षण शुरू हो जाता है।

सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अगर सैलरी 3 महीने तक नहीं मिलती है, तो कर्मचारी को पूरा अधिकार मिल जाता है कि वह अपने कफील की मर्जी के बिना (No Objection Certificate के बिना) दूसरी जगह नौकरी ज्वाइन कर सकता है। इसके अलावा, अब लेबर कोर्ट ऐसे मामलों को केवल 15 दिनों के भीतर निपटाने पर काम कर रहे हैं। हाल ही में रियाद में वेतन रोकने वाली कंपनियों पर 40 लाख रियाल का भारी जुर्माना भी लगाया गया है।

न्यूनतम वेतन और पेमेंट का नया तरीका

सरकार ने अलग-अलग श्रेणियों के लिए वेतन के नियम भी स्पष्ट किए हैं। सऊदी नागरिकों के लिए निजी क्षेत्र में कम से कम 4,000 रियाल (SAR) वेतन अनिवार्य है, जबकि इंजीनियरिंग क्षेत्र में यह सीमा 8,000 रियाल होगी। प्रवासी कामगारों के लिए वेतन उनके ‘क़िवा’ (Qiwa) कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर तय होगा।

घरेलू कामगारों, जैसे हाउस ड्राइवर और घर के नौकरों के लिए भी नियम बदल गए हैं। 1 जनवरी 2026 से इनकी सैलरी कैश में देना बंद हो जाएगा। नियुक्त को अब सैलरी केवल डिजिटल माध्यमों जैसे STC Pay, Urpay या बैंक ट्रांसफर के जरिए ही देनी होगी ताकि इसका पूरा रिकॉर्ड सरकार के पास रहे। अगर कोई नियोक्ता बिना वजह सैलरी रोकता है, तो आर्टिकल 94 के तहत उसे दोगुनी रकम चुकानी पड़ सकती है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.