सऊदी अरब ने माइनिंग सेक्टर में दुनिया भर में अपनी धाक जमा ली है। कनाडा के Fraser Institute की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब अब दुनिया के टॉप 10 देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है। साल 2013 में यह देश 104वें नंबर पर था, लेकिन अब 2025 की रैंकिंग में यह 10वें स्थान पर पहुंच गया है।

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यह सुधार काफी तेजी से हुआ है। 2024 में सऊदी अरब 23वें नंबर पर था और सिर्फ एक साल के अंदर 13 पायदान ऊपर चढ़कर 10वें नंबर पर आ गया। इस कामयाबी के पीछे नए माइनिंग इन्वेस्टमेंट लॉ और सरकारी नियमों में किए गए बड़े बदलावों का हाथ है।

उद्योग और खनिज संसाधन मंत्री Bandar Alkhorayef ने बताया कि सरकार बुनियादी ढांचे, नई टेक्नोलॉजी और फाइनेंस के जरिए इस पूरे सेक्टर को मजबूत बना रही है। मंत्रालय के प्रवक्ता Jarrah Aljarrah ने कहा कि लाइसेंस मिलने की प्रक्रिया अब आसान और पारदर्शी हो गई है, जिससे विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ा है।

सऊदी अरब ने माइनिंग नियमों की स्पष्टता, प्रशासनिक कामकाज और टैक्स सिस्टम के मामले में दुनिया में पहला स्थान हासिल किया है। सरकार ने लाइसेंस की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए Taadeen प्लेटफॉर्म और निगरानी के लिए Esnad कंपनी की शुरुआत की है।

माइनिंग सेक्टर से जुड़ी अहम जानकारियां

विवरण डेटा/रैंकिंग
2013 की रैंकिंग 104वां स्थान
2024 की रैंकिंग 23वां स्थान
2025 की रैंकिंग 10वां स्थान
कुल खनिज संपदा (अनुमानित) 2.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर
2025 में नया निवेश 44 अरब सऊदी रियाल से अधिक
2025 में शोषण लाइसेंस 61 (221% की बढ़त)
सक्रिय खोज लाइसेंस (2025 अंत तक) 1,108

सऊदी अरब का लक्ष्य माइनिंग सेक्टर को अपनी अर्थव्यवस्था का तीसरा सबसे बड़ा स्तंभ बनाना है, जो विजन 2030 का एक मुख्य हिस्सा है। सरकार नए प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय सहायता भी दे रही है, जिसमें कुछ लाइसेंसों के लिए 70 लाख सऊदी रियाल तक की मदद शामिल है। जून 2026 में हुई रिपोर्ट के अनुसार, सक्रिय ड्रिलिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या भी 2023 के 58 से बढ़कर 2024 में 160 हो गई है।