सऊदी अरब की सरकार ने अपनी राष्ट्रीय भाषा को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। 3 फरवरी 2026 को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में अरबी भाषा के लिए एक नई राष्ट्रीय नीति (National Policy for the Arabic Language) को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देश में 8 प्रमुख सिद्धांत तय किए गए हैं, जो सरकारी दफ्तरों के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियों पर भी लागू होंगे। इस फैसले का सीधा असर वहां काम कर रही कंपनियों और प्रवासियों पर पड़ेगा।

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प्राइवेट कंपनियों और दुकानों के लिए क्या बदलेगा?

नए नियमों के मुताबिक, अब सऊदी अरब में सभी तरह के व्यापारिक दस्तावेज, बिल, कॉन्ट्रैक्ट और दुकानों पर सामान के प्राइस टैग अरबी भाषा में होने अनिवार्य कर दिए गए हैं। अगर कोई कंपनी चाहे तो अंग्रेजी का इस्तेमाल कर सकती है, लेकिन वह सिर्फ दूसरी भाषा के तौर पर ही मान्य होगी। सरकार का मकसद है कि बिजनेस सेक्टर में अरबी भाषा का इस्तेमाल बढे। नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों पर सख्ती की जाएगी और पुराने नियमों के आधार पर 1 लाख रियाल तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

नौकरी और आम जीवन पर क्या असर होगा?

सऊदी विजन 2030 के तहत अब शिक्षा और सरकारी कामकाज में अरबी को ही मुख्य भाषा माना जाएगा। सड़कों पर लगे साइन बोर्ड, व्यापारिक नाम और राष्ट्रीय पहलों के नाम भी अब अरबी में ही लिखे जाएंगे। जो विदेशी लोग वहां प्रोफेशनल नौकरियों में हैं, उनके लिए भी भाषा की समझ रखना जरूरी हो सकता है, जिसके लिए कुछ टेस्ट (जैसे Hamzah Test) के माध्यम से उनकी योग्यता जांची जा सकती है। किंग सलमान ग्लोबल एकेडमी (KSGAAL) इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि सभी जगह सही अरबी भाषा का प्रयोग हो रहा है या नहीं।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.