सऊदी अरब की काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स ने बाज़ों (falcons) की देखभाल और उनके संरक्षण के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब सऊदी अरब में बाज़ों से जुड़ी गतिविधियों को संभालने के लिए ‘नेशनल सेंटर फॉर फॉल्कन्स’ (National Center for Falcons) बनाया गया है। यह सेंटर सऊदी फाल्कन्स क्लब की पुरानी भूमिका को आगे बढ़ाएगा और इस पूरे सेक्टर को एक नए सरकारी ढांचे के तहत विकसित करेगा।
नेशनल सेंटर फॉर फॉल्कन्स क्या है और यह कैसे काम करेगा?
यह एक सरकारी संस्था होगी जिसे अपनी वित्तीय और प्रशासनिक आजादी मिलेगी। इसका मुख्य मुख्यालय रियाद में होगा और यह सीधे प्रधानमंत्री से जुड़ा होगा। इस सेंटर का मुख्य उद्देश्य बाज़ों की सांस्कृतिक विरासत को बचाना और उसे स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है। इसके लिए यह सेंटर कई इवेंट्स, प्रदर्शनियां, कॉन्फ्रेस और वर्कशॉप आयोजित करेगा।
इस नए सेंटर के पास क्या अधिकार और जिम्मेदारियां होंगी?
- बाज़ों से जुड़ी जानकारियों का डेटाबेस तैयार करना और उनके लिए तय किए गए रिजर्व इलाकों और साइट्स की देखरेख करना।
- सरकारी मंजूरी के बाद बाज़ों की नीलामी (auctions) का आयोजन करना।
- प्राइवेट सेक्टर के साथ पार्टनरशिप और निवेश के जरिए अपनी कमाई के नए साधन विकसित करना।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी अरब का प्रतिनिधित्व करना और विदेशी संस्थाओं के साथ समझौते और मेमोरेंडम साइन करना।
- बाज़ों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने के प्रोग्राम चलाना।
सेंटर का मैनेजमेंट कौन संभालेगा?
सेंटर के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में इंटीरियर मिनिस्ट्री, स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री, कल्चर मिनिस्ट्री और पर्यावरण, जल एवं कृषि मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल होंगे। साथ ही इसमें कुछ एक्सपर्ट्स को भी जगह मिलेगी। फिलहाल, जब तक नया बोर्ड नहीं बनता, तब तक सऊदी फाल्कन्स क्लब का मौजूदा बोर्ड ही इस सेंटर की शक्तियों का इस्तेमाल करेगा। यह सेंटर हर साल अपनी उपलब्धियों और खर्चों की रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यह फैसला कब लिया गया और कब लागू हुआ?
काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स ने 6 मई 2026 को इस नियम को मंजूरी दी और 15 मई 2026 को इसे आधिकारिक गजट ‘उम्म अल-कुरा’ में प्रकाशित किया गया।
नेशनल सेंटर फॉर फॉल्कन्स का मुख्य मकसद क्या है?
इसका मुख्य मकसद बाज़ों को एक सांस्कृतिक विरासत के रूप में सुरक्षित रखना, उनके संरक्षण के लिए काम करना और इस क्षेत्र को एक संगठित आर्थिक गतिविधि में बदलना है।
