सऊदी अरब के वित्त मंत्री और ‘नेशनल सेंटर फॉर प्राइवेटाइजेशन’ (NCP) के अध्यक्ष मोहम्मद अल-जदान ने एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने बताया कि आर्थिक और विकास मामलों की परिषद (CEDA) ने ‘नेशनल प्राइवेटाइजेशन स्ट्रैटेजी’ (National Privatization Strategy) के लागू होने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला 28 जनवरी 2026 को लिया गया है। अब सऊदी अरब में सरकारी काम का तरीका बदलने वाला है, जिसका सीधा असर वहां काम करने वाले विदेशी कामगारों पर पड़ सकता है। सरकार अब योजनाओं को बनाने के चरण से निकलकर उन्हें जमीन पर लागू करने के चरण में आ गई है।

किन क्षेत्रों में होगा बदलाव और क्या है नया प्लान?

सरकार का मुख्य लक्ष्य देश की अर्थव्यवस्था में प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी को बढ़ाना है। अभी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में प्राइवेट सेक्टर का हिस्सा 40% है, जिसे बढ़ाकर 65% करने की योजना है। इस रणनीति के तहत कुल 18 क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसमें स्वास्थ्य, परिवहन, पानी, ऊर्जा और शिक्षा जैसे जरूरी क्षेत्र हैं। अब इन सेक्टर्स में सरकार केवल नियम बनाएगी और निगरानी करेगी, जबकि सेवाएं देने और चलाने का काम प्राइवेट कंपनियों का होगा। वित्त मंत्री ने बताया कि 2025 के अंत तक गैर-तेल सरकारी राजस्व का लक्ष्य 143 बिलियन रियाल रखा गया है।

प्रवासियों और नौकरियों पर इसका सीधा असर

इस नई रणनीति के साथ ही सौदीकरण (Saudization) के नियम भी काफी सख्त हो रहे हैं, जिससे प्रवासियों के लिए सामान्य नौकरी पाना मुश्किल हो सकता है। 2026 के नए नियमों के मुताबिक, विदेशी स्वामित्व वाली जिन कंपनियों में 100 से ज्यादा कर्मचारी हैं, वहां 30% सऊदी नागरिक होना अनिवार्य कर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब केवल हाई-स्किल और तकनीकी विशेषज्ञों की मांग बनी रहेगी, जबकि मिड-लेवल जॉब्स स्थानीय लोगों को दी जाएंगी।

मुख्य बदलाव जो प्रवासियों को प्रभावित करेंगे:

  • मार्केटिंग और सेल्स की नौकरियों में अब 60% स्टाफ सऊदी नागरिक होना चाहिए।
  • फार्मेसी और डेंटिस्ट्री जैसे मेडिकल फील्ड में प्रवासियों की जगह सऊदी नागरिकों को रखने के लिए दो चरणों वाली योजना लागू है।
  • विदेशी विशेषज्ञों को पहले जो सैलरी प्रीमियम 40-100% मिलता था, वह अब घटकर मात्र 5-8% रह गया है।
  • कुछ क्षेत्रों में जनरल मैनेजर के बाद दूसरे नंबर का पद अनिवार्य रूप से सऊदी नागरिक के लिए आरक्षित किया जा रहा है।
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.