सऊदी अरब में अब सरकारी कामकाज में ढिलाई बरतने वालों की खैर नहीं है. सरकार ने नया ‘एग्जीक्यूशन सिस्टम’ लागू किया है, जिसमें कोर्ट के आदेश को रोकने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है. यह कदम लोगों के हक को जल्दी दिलाने और सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है.

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सरकारी कर्मचारियों और धोखाधड़ी करने वालों के लिए क्या सजा है?

सऊदी काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स ने नए नियमों को मंजूरी दे दी है. अब अगर कोई सरकारी कर्मचारी या उसके बराबर के पद पर बैठा व्यक्ति कोर्ट के आदेश को लागू करने में बाधा डालता है, तो उसे 5 साल तक की जेल हो सकती है. इसे भरोसे और ईमानदारी के खिलाफ अपराध माना गया है. इसके अलावा अन्य गलतियों के लिए भी भारी जुर्माना और जेल की सजा तय की गई है.

अपराध सजा/जुर्माना
कोर्ट आदेश में बाधा डालने वाला सरकारी कर्मचारी 5 साल तक की जेल
पैसा छिपाना या गलत जानकारी देना 3 साल तक की जेल और 10 लाख रियाल तक जुर्माना
संपत्ति की जानबूझकर बर्बादी करना 15 साल तक की जेल
काम में देरी करना (प्रति दिन) 5,000 सऊदी रियाल जुर्माना

नए नियमों में क्या खास बदलाव किए गए हैं?

इस नए सिस्टम का मकसद डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर कानूनी प्रक्रियाओं को तेज करना है. न्याय मंत्री डॉ. वलीद बिन मोहम्मद अल-समानी ने बताया कि इससे लोगों को उनका हक मिलने में आसानी होगी. नए नियमों की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • कर्जदारों के लिए राहत: अब वित्तीय लेन-देन के मामलों में कर्जदारों को जेल नहीं भेजा जाएगा, बल्कि उनकी संपत्ति से वसूली की जाएगी.
  • समय सीमा: सभी संबंधित विभागों को कोर्ट के आदेशों का पालन 3 कार्य दिवसों के भीतर करना होगा.
  • डिजिटल सिस्टम: अब इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन और आधुनिक डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी रोकने और पैसा ट्रैक करने का काम होगा.
  • ट्रैवल बैन: यात्रा प्रतिबंधों के नियम अब और स्पष्ट होंगे और उनकी एक तय समय सीमा होगी.

यह नया कानून 1 मई 2026 को आधिकारिक गजट ‘उम्म अल-कुरा’ में प्रकाशित किया गया था. यह नियम प्रकाशन की तारीख से 180 दिनों के बाद पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगा.

Frequently Asked Questions (FAQs)

नया एग्जीक्यूशन सिस्टम कब से लागू होगा?

यह सिस्टम 1 मई 2026 को प्रकाशित हुआ था और यह प्रकाशन के 180 दिनों के बाद से पूरी तरह लागू होगा.

क्या अब कर्जदारों को जेल भेजा जाएगा?

नहीं, नए नियम के मुताबिक अब कर्जदारों को जेल भेजने के बजाय उनकी वित्तीय संपत्तियों पर ध्यान दिया जाएगा और वहीं से वसूली की जाएगी.