सऊदी अरब ने उन कंपनियों के लिए एक नया नियम जारी किया है जिनके पास 20 या उससे ज्यादा वर्कर काम करते हैं. नेशनल प्रोग्राम फॉर डेवलपिंग कलेक्टिव हाउसिंग फॉर इंडिविजुअल्स ने सभी कंपनियों को वर्करों के रहने की जगह को रेगुलराइज करने का सख्त निर्देश दिया है. अगर कंपनियां इस नियम का पालन नहीं करती हैं तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उनके कई सरकारी काम भी रोके जा सकते हैं.

कंपनियों के पास हाउसिंग रेगुलराइज करने के दो रास्ते

सरकार ने कंपनियों को अपने वर्करों के आवास को नियम के दायरे में लाने के लिए दो विकल्प दिए हैं. कंपनियां अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से कोई भी विकल्प चुन सकती हैं.

  • पहला विकल्प (डायरेक्ट लाइसेंस): कंपनियां Balady प्लेटफार्म के जरिए अपनी खुद की बिल्डिंग के लिए कलेक्टिव हाउसिंग लाइसेंस ले सकती हैं. इसके लिए उन्हें म्युनिसिपल, स्वास्थ्य और सुरक्षा के सभी मानकों को पूरा करना होगा.
  • दूसरा विकल्प (कॉन्ट्रैक्टिंग): अगर कंपनी के पास अपनी बिल्डिंग नहीं है, तो वे पहले से लाइसेंस प्राप्त हाउसिंग यूनिट्स के साथ कॉन्ट्रैक्ट कर सकती हैं. यह काम Balady या Ejar प्लेटफार्म के जरिए किया जा सकता है.

नियम न मानने पर क्या होगी कार्रवाई

सरकार ने साफ कर दिया है कि जो कंपनियां अपने वर्करों के हाउसिंग का रजिस्ट्रेशन नहीं कराएंगी, उन पर सख्त एक्शन लिया जाएगा.

  • सरकारी सेवाएं बंद: नियम न मानने वाली कंपनियों की Qiwa प्लेटफार्म पर मौजूद सरकारी सेवाएं रोक दी जाएंगी. इसमें नए Visa का कोटा बढ़ाना या वर्कर का स्पॉन्सरशिप ट्रांसफर करना शामिल है.
  • जुर्माना: नए नियम के तहत अगर वर्करों के रहने की जगह बिना लाइसेंस के पाई जाती है, तो कंपनी के आकार और गलती के हिसाब से 10,000 से 15,000 रियाल तक का जुर्माना लग सकता है.
  • लगातार चेकिंग: हाउसिंग नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, यह देखने के लिए फील्ड टीमें लगातार जांच कर रही हैं और बिना देरी किए कार्रवाई कर रही हैं.

वर्करों की सुरक्षा और शहर की सुंदरता पर फोकस

इस नए नियम का मुख्य मकसद वर्करों को साफ, हवादार और सुरक्षित माहौल देना है ताकि बीमारियों को फैलने से रोका जा सके. इसके साथ ही कमर्शियल जगहों पर बिना परमिशन के बने रिहायशी मकानों को हटाना भी सरकार का लक्ष्य है. यह कदम सऊदी अरब के विजन 2030 के तहत शहरों की सुंदरता और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.