सऊदी अरब में रहने वाले लाखों प्रवासियों के लिए बड़ी खबर है क्योंकि सरकार ने इकामा और वीज़ा नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं। अब प्रवासियों को 5 साल का फिजिकल रेजिडेंट आईडी कार्ड दिया जाएगा और नौकरी बदलने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है। इसी बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए 40 से ज्यादा देशों ने एक नया गठबंधन बनाया है ताकि तेल और गैस की सप्लाई बिना किसी डर के जारी रह सके। इन बदलावों का सीधा असर खाड़ी देशों में काम करने वाले और वहां यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों पर पड़ेगा।

सऊदी अरब में प्रवासियों के लिए लागू हुए ये नए नियम

सऊदी अरब ने अपनी लेबर मार्केट को सुधारने के लिए 2026 की पहली तिमाही में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। अब प्रवासियों के वर्क परमिट उनकी पढ़ाई, अनुभव और उम्र के आधार पर दिए जाएंगे। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब 5 साल का फिजिकल मुकीम कार्ड (Resident Identity card) दिया जाएगा। हालांकि रेजिडेंसी स्टेटस को डिजिटल तरीके से हर साल या दो साल में रिन्यू करना होगा। जो लोग वीज़ा नियमों का उल्लंघन करेंगे उन पर 50,000 रियाल तक का जुर्माना और हमेशा के लिए एंट्री बैन लगाई जाएगी।

  • नौकरी बदलना हुआ आसान: Qiwa प्लेटफॉर्म के जरिए अब प्रवासी कर्मचारी अपना कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद पुराने मालिक की परमिशन के बिना भी दूसरी जगह काम कर सकते हैं।
  • प्रवासियों के लिए सुरक्षित कॉन्ट्रैक्ट: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों के लिए अब फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट जरूरी कर दिया गया है ताकि उन्हें नौकरी की सुरक्षा मिल सके।
  • आरक्षित पद: जनरल मैनेजर, सेल्स रिप्रेजेंटेटिव, मार्केटिंग स्पेशलिस्ट और प्रोक्योरमेंट मैनेजर जैसे बड़े पद अब केवल सऊदी नागरिकों के लिए आरक्षित होंगे।
  • वीज़ा एक्सटेंशन: जिन लोगों के वीज़ा 25 फरवरी 2026 के बाद एक्सपायर हुए हैं उन्हें 18 अप्रैल 2026 तक एमरजेंसी एक्सटेंशन की सुविधा दी गई है।

होर्मुज की सुरक्षा के लिए 40 देशों का नया गठबंधन

ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते को सुरक्षित करने के लिए करीब 40 देशों ने हाथ मिलाया है। ब्रिटेन और फ्रांस की अगुवाई में बनी इस टीम में भारत, यूएई, जर्मनी, और कनाडा जैसे देश शामिल हैं। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों को कोई नुकसान न हो। सऊदी अरब ने भी इस रास्ते को फिर से खुलवाने के लिए हुई उच्च स्तरीय बैठक में हिस्सा लिया है।

गठबंधन की मुख्य बातें विवरण
प्रमुख नेतृत्व यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) और फ्रांस
शामिल मुख्य देश भारत, यूएई, बहरीन, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया
उद्देश्य समुद्री रास्ते से होने वाले व्यापार को सुरक्षित बनाना
अगला कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को एस्कॉर्ट करना और सुरक्षा देना

ब्रिटेन की विदेश सचिव Yvette Cooper ने कहा है कि इस गठबंधन के जरिए कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बनाकर समुद्री रास्ते को पूरी तरह खुलवाया जाएगा। हालांकि अमेरिका ने इस काम को अपनी सीधी जिम्मेदारी नहीं माना है और वह इस विशेष गठबंधन का हिस्सा नहीं बना है। बहरीन ने भी संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव रखा है ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से जहाजों को आने-जाने की आजादी मिल सके। फिलहाल रूस ने कहा है कि उसके जहाजों के लिए यह रास्ता खुला हुआ है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com