सऊदी अरब में कर्ज लेने वालों के लिए अब बचना मुश्किल होगा। सऊदी न्याय मंत्री डॉ. वलीद अल-समानी ने ऐलान किया है कि अब कर्ज वसूली के लिए सिर्फ बैंक अकाउंट ही नहीं, बल्कि पैसों के लेन-देन पर भी नजर रखी जाएगी। यह कदम खास तौर पर उन लोगों के लिए है जिन्होंने बड़े कर्ज लिए हैं और उन्हें चुका नहीं रहे हैं।
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यह नया नियम अप्रैल 2026 में काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स द्वारा मंजूर किए गए नए एनफोर्समेंट सिस्टम के तहत लागू किया गया है। न्याय मंत्री डॉ. अल-समानी ने बताया कि इस सिस्टम का मकसद कर्ज देने वालों के हक की रक्षा करना और उनका पैसा वापस दिलाना है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि इस नियम को बनाते समय कर्जदार और उनके परिवार के बुनियादी अधिकारों का भी ख्याल रखा गया है। सरकार का मकसद किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं बल्कि हक दिलाना है।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम
इस नई व्यवस्था के तहत सरकारी एजेंसियों और प्राइवेट सेक्टर के बीच डेटा शेयरिंग को बढ़ाया गया है। इससे अब लोगों और कंपनियों के पैसों के लेनदेन को ट्रैक करना आसान हो जाएगा। इससे उन लोगों को पकड़ने में मदद मिलेगी जो अपना पैसा छिपाते हैं या कर्ज चुकाने से बचते हैं। इससे बिजनेस और वित्तीय लेन-देन में लोगों का भरोसा और बढ़ेगा।
जानकारी के लिए बता दें कि डेटा तक पहुँचने के लिए संबंधित कोर्ट से विशेष आदेश लेना होगा और यह पूरी प्रक्रिया सख्त नियमों के तहत होगी।
महत्वपूर्ण आंकड़े और नियम
कर्ज वसूली और नए नियमों से जुड़ी जरूरी जानकारियां नीचे दी गई तालिका में देखी जा सकती हैं:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नया कानून जारी होने की तारीख | 20 अप्रैल 2026 |
| लागू होने का समय | प्रकाशन के 180 दिन बाद |
| 2025 में कुल एनफोर्समेंट अनुरोध | 16 लाख |
| 2025 में कुल बकाया राशि | 165 अरब सऊदी रियाल |
| संपत्ति का खुलासा करने की अवधि | 10 कार्य दिवस |
| हिरासत (Detention) की शर्त | 10 लाख रियाल या उससे अधिक का कर्ज |
अन्य बड़े बदलाव
नए कानून के तहत अब तुरंत एनफोर्समेंट ऑर्डर, तुरंत जब्ती, रोजाना जुर्माना और यात्रा प्रतिबंध (Travel Ban) जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, 16 जून 2026 को काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग से जुड़े जब्त पैसों के प्रबंधन के लिए भी एक नया सिस्टम मंजूर किया है।
कर्जदारों के लिए एक और राहत यह है कि अब पब्लिक ई-सर्विसेज को केवल वित्तीय लेन-देन तक ही सीमित रखा जाएगा। हिरासत की बात करें तो यह केवल तब होगी जब कर्ज 10 लाख रियाल से ज्यादा हो और कर्जदार तीन महीने के भीतर भुगतान करने या दिवालिया होने की अर्जी देने में नाकाम रहे।