सऊदी अरब ने अब अपने काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। राज्य ने कहा है कि इलाके में शांति लाने के लिए अब नई रणनीतियों की जरूरत है। सऊदी का मानना है कि केवल सैन्य ताकत और दबदबे के दम पर टिकाऊ सुरक्षा नहीं मिल सकती और इसलिए अब नए रास्तों को अपनाया जाएगा।

बातचीत और आर्थिक तरक्की पर जोर

Akhbar24 की रिपोर्ट के मुताबिक, 26 जून 2026 को सऊदी अरब ने साफ किया कि सैन्य शक्ति से लंबी अवधि की सुरक्षा नहीं आती। सऊदी सरकार अब विजन 2030 के जरिए कूटनीति, आपसी सहयोग और आर्थिक एकीकरण पर काम कर रही है ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।

  • ईरान से रिश्ते: मार्च 2023 में चीन की मदद से ईरान के साथ फिर से राजनयिक संबंध शुरू किए गए ताकि तनाव कम हो।
  • शांति बोर्ड (BoP): 21 जनवरी 2026 को प्रिंस फैसल बिन फरहान ने बोर्ड ऑफ पीस के चार्टर पर साइन किए ताकि गाजा संकट के बाद के हालातों को बेहतर बनाया जा सके।
  • सुरक्षा और समृद्धि: सऊदी का मानना है कि अगर पड़ोसी देशों की आर्थिक हालत सुधरेगी, तो अपने आप सुरक्षा बढ़ेगी। इसे ‘Security through Prosperity’ का तरीका कहा जा रहा है।

रक्षा और वैश्विक संबंध

सऊदी अरब अब केवल एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता। वह अमेरिका, चीन और रूस जैसे बड़े देशों के साथ अपने रिश्ते बढ़ा रहा है ताकि अपनी जरूरतों को पूरा कर सके। रक्षा के क्षेत्र में भी सऊदी अब आत्मनिर्भर बनना चाहता है और 2030 तक 50% सैन्य सामान देश के अंदर ही बनाने का लक्ष्य रखा है।

हाल ही में मई और मार्च 2026 में जब ईरान ने अमेरिकी जहाजों और UAE पर हमले किए, तब सऊदी ने संयम बरतने और बातचीत से मसले हल करने की अपील की थी। इस दौरान सऊदी ने पाकिस्तान की मध्यस्थता का भी समर्थन किया। हालांकि, क्षेत्रीय प्रभाव और आर्थिक नेतृत्व को लेकर सऊदी और UAE के बीच मुकाबला अब भी जारी है, जो खासकर यमन, सूडान और सोमालिया में देखा जा सकता है।