सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था अब सिर्फ तेल के भरोसे नहीं रही। नए आंकड़ों के मुताबिक, देश की कुल जीडीपी (GDP) में गैर-तेल गतिविधियों की हिस्सेदारी बढ़कर 55 प्रतिशत हो गई है। यह बड़ा बदलाव सऊदी विजन 2030 के तहत किया जा रहा है ताकि देश की कमाई के नए जरिए ढूंढे जा सकें और अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
सऊदी की इकोनॉमी में गैर-तेल सेक्टर का क्या रोल है?
25 अप्रैल 2026 को आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, गैर-तेल गतिविधियों ने अब सऊदी अर्थव्यवस्था के आधे से ज्यादा हिस्से पर कब्जा कर लिया है। अर्थव्यवस्था और योजना मंत्री Faisal Alibrahim ने पहले बताया था कि साल 2024 में यह आंकड़ा 54.8 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की प्रमुख Kristalina Georgieva ने भी फरवरी 2026 में कहा कि सऊदी अरब आर्थिक विविधता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विजन 2030 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी और निवेश बढ़ने की वजह से यह मुमकिन हुआ है। अब पर्यटन, मनोरंजन, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश किया जा रहा है जिससे आम लोगों के लिए रोजगार के नए मौके खुल रहे हैं।
आंकड़ों में समझें सऊदी की आर्थिक तरक्की और भविष्य के लक्ष्य
सऊदी सरकार ने आने वाले समय के लिए कुछ बड़े लक्ष्य तय किए हैं। इसमें प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़ाना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना शामिल है। नीचे दी गई टेबल में पूरी जानकारी दी गई है:
| विवरण | आंकड़ा / लक्ष्य |
|---|---|
| गैर-तेल जीडीपी हिस्सा (2026) | 55% |
| गैर-तेल जीडीपी हिस्सा (2024) | 54.8% |
| ग्रोथ रेट (2024) | 6% |
| ग्रोथ रेट (2025) | 4.9% |
| ग्रोथ रेट (2026 अनुमान) | 4.3% |
| कुल निवेश लक्ष्य (2030) | 4 ट्रिलियन रियाल |
| प्राइवेट सेक्टर जीडीपी लक्ष्य | 65% |
| गैर-तेल निर्यात लक्ष्य | 50% |
सऊदी अरब का मकसद अब अपने एक्सपोर्ट में गैर-तेल उत्पादों की हिस्सेदारी 16% से बढ़ाकर 50% करना है। इसके लिए Public Investment Fund (PIF) कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।