सऊदी अरब ने तेल पर अपनी निर्भरता कम करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है. S&P Global Ratings की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की कुल अर्थव्यवस्था (GDP) में अब 70 प्रतिशत हिस्सा नॉन-ऑयल सेक्टर और सरकारी कामकाज का हो गया है. साल 2018 में यह आंकड़ा केवल 65 प्रतिशत था. विजन 2030 के तहत किए जा रहे आर्थिक बदलावों का सीधा असर अब देश के विकास पर नजर आ रहा है.

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आम लोगों और कामगारों के लिए इसके क्या मायने हैं?

नॉन-ऑयल सेक्टर में बढ़ोतरी का सीधा मतलब है कि देश में टूरिज्म, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है.

इस विकास से घरेलू खपत और लोगों की खर्च करने की क्षमता में बढ़ोतरी होती है.

खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय और अन्य कामगारों के लिए इन नए सेक्टर्स में रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा हो रहे हैं.

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं की रोजगार में भागीदारी औसतन 31 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में एक बड़ा कारण है.

40 बिलियन डॉलर का सालाना निवेश और आगे की योजना

देश में बुनियादी ढांचे, हाउसिंग और आधुनिक टेक्नोलॉजी के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए Public Investment Fund (PIF) हर साल लगभग 40 बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है.

S&P ने 2027 और 2028 के लिए रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 3.3 प्रतिशत सालाना तय किया है.

इसके साथ ही सऊदी अरब की क्रेडिट रेटिंग को ‘A+/A-1’ और Stable Outlook पर बरकरार रखा गया है.

सरकार अपनी अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए East-West पाइपलाइन और बड़े स्टोरेज सुविधाओं का भी विस्तार कर रही है.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.