Saudi Arabia Nuclear Deal: अमेरिका ने सऊदी अरब का न्यूक्लियर समझौता भेजा कांग्रेस के पास, रखी बड़ी शर्त.

Aanya25 August 20262 min read72 viewsSaudi
Saudi Arabia Nuclear Deal: अमेरिका ने सऊदी अरब का न्यूक्लियर समझौता भेजा कांग्रेस के पास, रखी बड़ी शर्त.

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने आधिकारिक तौर पर सऊदी अरब के साथ हुए सिविल न्यूक्लियर एनर्जी समझौते को कांग्रेस के पास भेज दिया है। यह बड़ा कदम 25 अगस्त 2026 को उठाया गया, जिसके तहत इस डील को आगे बढ़ाने के लिए एक ही शर्त रखी गई है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह समझौता तभी आगे बढ़ेगा जब सऊदी अरब Abraham Accords से जुड़ेगा और इस्राइल के साथ अपने संबंधों को सामान्य करेगा। इस समझौते पर अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright और सऊदी ऊर्जा मंत्री Abdulaziz bin Salman Al Saud ने 22 जुलाई 2026 को एक हस्ताक्षर समारोह के दौरान मुहर लगाई थी। इस पूरी प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी United States Department of Energy की वेबसाइट पर साझा की गई है।

कांग्रेस को मिला समीक्षा का समय और सुरक्षा उपायों पर चिंता

अब अमेरिकी कानून निर्माताओं के पास इस प्रस्ताव की समीक्षा के लिए लगभग 90 दिन का समय है। यदि इस तय समय में कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई जाती है, तो यह समझौता अपने आप लागू हो जाएगा। हालांकि, प्रशासन के अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि इस डील में 'गोल्ड स्टैंडर्ड' नॉनप्रोलिफरेशन यानी परमाणु प्रसार रोकने वाली सख्त शर्तें शामिल नहीं हैं। इसका मतलब है कि इसमें यूरेनियम संवर्धन (uranium enrichment) को औपचारिक रूप से छोड़ने या अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अतिरिक्त प्रोटोकॉल को अनिवार्य रूप से अपनाने जैसी बातें शामिल नहीं हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस समझौते का बचाव करते हुए इसे रियाद के साथ गठबंधन को मजबूत करने की एक रणनीतिक पहल बताया है, हालांकि कड़े सुरक्षा उपायों की कमी के कारण उन्हें संसद के भीतर कई तीखे सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

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संसद में बढ़ रहा विरोध और क्षेत्रीय तनाव की आशंका

इस समझौते को लेकर कांग्रेस के भीतर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस सदस्य John Garamendi और Don Beyer के साथ-साथ सीनेटर Edward J. Markey और Jeff Merkley ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के उच्च मानकों की कमी के कारण यह समझौता मध्य पूर्व में एक नए परमाणु हथियार की दौड़ को बढ़ावा दे सकता है। इस संबंध में सांसदों के विचारों और उनके द्वारा लिखे गए लेख की विस्तृत जानकारी Garamendi House Government के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध है। इन चिंताओं को तब और बल मिला जब सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने अपने पिछले बयानों में कहा था कि यदि ईरान परमाणु हथियार विकसित करता है, तो उनका देश भी इसे हासिल करने की कोशिश करेगा।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही इस डील को सऊदी अरब द्वारा इस्राइल को मान्यता देने से जोड़ रहे हैं, लेकिन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के परमाणु अप्रसार विशेषज्ञ Alexander Bollfrass जैसे जानकारों ने इसे स्थापित अमेरिकी नीतियों से एक बड़ा विचलन करार दिया है। इस डील के आगे बढ़ने से खाड़ी क्षेत्र के भू-राजनीतिक समीकरणों पर गहरा असर पड़ सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

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