जुलाई 2026 में सऊदी अरब से चीन को होने वाले कच्चे तेल के निर्यात में बड़ी कमी देखने को मिली है। बाजार में चल रही चर्चाओं के उलट आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि सऊदी क्रूड की डिलीवरी इस महीने अब तक के सबसे निचले स्तरों में से एक है। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco ने जुलाई महीने के लिए चीन को लगभग 12 मिलियन बैरल तेल भेजने की योजना बनाई थी, जो रोजाना के हिसाब से करीब 387,000 बैरल बैठता है।
गिरावट की मुख्य वजहें
इस कमी के पीछे कई कारण हैं। सऊदी तेल की ऊंची कीमतें और चीन की रिफाइनरियों की तरफ से कम मांग इसके बड़े कारण माने जा रहे हैं। साथ ही, चीन अब रूस से मिल रहे सस्ते क्रूड को ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है। चीनी रिफाइनरी कंपनी Sinopec ने लगातार दूसरे महीने सऊदी से कोई खरीदारी नहीं की है और Rongsheng Petrochemical Co. ने भी अपने ऑर्डर काफी कम कर दिए हैं।
जियोपॉलिटिकल तनाव और शिपिंग में चुनौतियां
क्षेत्रीय तनाव का असर शिपिंग रूट पर भी पड़ा है। अमेरिका-ईरान विवाद और हूती विद्रोहियों की धमकियों की वजह से रेड सी (Red Sea) के रास्ते तेल पहुंचाना मुश्किल हो गया है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सुरक्षा खतरों के चलते सऊदी अरब को अपने तेल का कुछ हिस्सा Yanbu बंदरगाह के जरिए भेजना पड़ रहा है। हालांकि, 26 जुलाई को New Explorer और New Pearl नाम के दो बड़े जहाजों ने 2-2 मिलियन बैरल कच्चा तेल लेकर सफलता के साथ बाब अल-मंदेब को पार किया, लेकिन समग्र यातायात पर इसका असर अभी भी बना हुआ है।
