सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद और पाकिस्तान के उप प्रधान मंत्री व विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई है। इस बातचीत में मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गहराई से चर्चा की गई। 16 मार्च 2026 को हुई इस कॉल का मुख्य फोकस क्षेत्र में चल रहे सैन्य तनाव और हालिया हमलों के बाद की स्थिति पर था। दोनों नेताओं ने शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई है।
क्या है इस बातचीत का मुख्य कारण?
हाल ही में सऊदी अरब के रियाद और पूर्वी क्षेत्र में हवाई खतरे देखे गए हैं। सऊदी एयर डिफेंस ने 31 ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया है। इसके अलावा शयबा तेल क्षेत्र और प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर भी मिसाइल और ड्रोन से हमले की कोशिश की गई थी जिसे सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया।
इसी तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए दोनों देशों के बीच यह हाई अलर्ट बातचीत हुई है। सऊदी अरब और पाकिस्तान ने सितंबर 2025 में हुए अपने रक्षा समझौते को भी दोहराया है जिसमें एक पर हमले को दोनों पर खतरा माना गया है। आम नागरिकों की यात्रा को लेकर फिलहाल कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाया गया है लेकिन क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
पाकिस्तान पर इसका क्या असर हुआ है?
इस क्षेत्रीय तनाव का सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और ईंधन की सप्लाई पर पड़ा है। तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण पाकिस्तान सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं। ईंधन बचाने के लिए पाकिस्तान में सरकारी कार्यालयों के लिए अब 4 दिन का वर्क वीक लागू कर दिया गया है।
इसके साथ ही वहां के स्कूलों को 2 सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। 12 मार्च को जेद्दा में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के बीच हुई बैठक के बाद इस फोन कॉल को काफी अहम माना जा रहा है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि इस क्षेत्र को किसी भी नए खतरे से बचाने के लिए आपसी तालमेल बहुत जरूरी है।
