सऊदी अरब अब अपनी दवाइयां खुद बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि देश में फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री का लोकलाइजेशन अब 30.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि अब ज़्यादा दवाइयां बाहर से मंगाने के बजाय सऊदी में ही तैयार की जा रही हैं।
सऊदी सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक देश की ज़रूरत की 40 प्रतिशत दवाइयां यहीं बनाई जाएं। National Industrial Development and Logistics Programme (NIDLP) के तहत यह काम किया जा रहा है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में आत्मनिर्भरता आए और स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के नए मौके पैदा हों।
इस काम में कई सरकारी संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं। Ministry of Industry and Mineral Resources नियम बना रही है, जबकि Saudi Food and Drug Authority (SFDA) दवाओं की क्वालिटी और रजिस्ट्रेशन देख रही है। वर्तमान में SFDA से 56 फार्मास्युटिकल फैसिलिटीज़ को लाइसेंस मिला हुआ है। वहीं National Unified Procurement Company (NUPCO) अब उन दवाओं को ज़्यादा प्राथमिकता दे रही है जो सऊदी में बनी हैं और SFDA से रजिस्टर्ड हैं।
निवेश के लिहाज़ से भी बड़ा बदलाव दिख रहा है। Public Investment Fund (PIF) ने Lifera नाम की कंपनी शुरू की है जो वैक्सीन और इंसुलिन जैसे ज़रूरी प्रोडक्ट्स पर ध्यान दे रही है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो। इसके अलावा, Stada Arzneimittel AG ने सऊदी में 100 मिलियन डॉलर का निवेश कर नया प्लांट लगाने की योजना बनाई है।
देश की बड़ी कंपनियों जैसे SPIMACO, Tabuk Pharmaceuticals और Jamjoom Pharma के साथ-साथ Sanofi और Pfizer जैसी ग्लोबल कंपनियां भी अब सऊदी के साथ मिलकर काम कर रही हैं। Jamjoom Pharma ने हाल ही में Pfizer की एक फैसिलिटी को खरीदने का समझौता किया है ताकि उत्पादन को और बढ़ाया जा सके।