सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता की जमकर तारीफ की है। सऊदी अरब चाहता है कि ईरान इस मौके का सही इस्तेमाल करे और किसी भी तरह की बड़ी लड़ाई या टकराव को टालने के लिए बातचीत की मेज पर आए।

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पाकिस्तान की मध्यस्थता और सऊदी अरब का समर्थन

सऊदी अरब ने साफ किया है कि वह पाकिस्तान के उन प्रयासों की कद्र करता है जो ईरान और अमेरिका के बीच शांति लाने के लिए किए जा रहे हैं। इस सिलसिले में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:

  • 17 मई 2026: इस्लामाबाद में सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की।
  • 14 मई 2026: सऊदी अरब ने पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका का समर्थन किया ताकि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ सके।
  • 11-12 मई 2026: प्रिंस फैसल ने ईरान और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात कर राजनयिक समाधान पर जोर दिया।

ईरान से क्या उम्मीद है और क्या है मकसद

सऊदी अरब की कोशिश है कि ईरान जल्द से जल्द बातचीत में शामिल हो ताकि पूरी दुनिया और इस क्षेत्र में स्थायी शांति आ सके। इसका मुख्य लक्ष्य Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा को फिर से वैसा ही बनाना है जैसा वह 28 फरवरी 2026 से पहले था। अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी बातचीत के लिए एक और मौका दिया है ताकि संघर्ष को खत्म किया जा सके। 19 मई 2026 को ईरान ने इस दिशा में एक जवाबी प्रस्ताव भी पेश किया था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच शांति के लिए कौन मध्यस्थता कर रहा है

पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहा है, जिसकी सऊदी अरब ने भी खुले तौर पर सराहना की है।

सऊदी अरब इस बातचीत से क्या हासिल करना चाहता है

सऊदी अरब चाहता है कि क्षेत्र में तनाव कम हो और Strait of Hormuz में सुरक्षा और नेविगेशन की आजादी फिर से बहाल हो जाए।