सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस (Prince Sultan Air Base) पर शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस हमले में कम से कम 10 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। ईरान की ओर से किए गए इस हमले में सेना के कई रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट (refueling aircraft) को भी नुकसान पहुंचा है। घायलों में से दो सैनिकों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिनका इलाज चल रहा है।

हमले से जुड़ी मुख्य जानकारियां और नुकसान

इस हमले के बारे में अमेरिकी अधिकारियों ने कुछ अहम जानकारियां साझा की हैं। प्रिंस सुल्तान एयर बेस को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में जान-माल का काफी नुकसान हुआ है:

  • हमले में घायल 10 सैनिकों में से 2 की स्थिति नाजुक बनी हुई है।
  • ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने अमेरिकी सेना के ईंधन भरने वाले विमानों को सीधे तौर पर निशाना बनाया।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक E-3 Sentry AWACS कमांड विमान को भी नुकसान पहुंचा है जिसकी तस्वीरें इंटरनेट पर देखी गई हैं।
  • इससे पहले 1 मार्च को हुए हमले में एक अमेरिकी सैनिक की जान भी चली गई थी।
  • सऊदी अरब ने 6 मार्च को भी ईरान की ओर से दागी गई तीन बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया था।

मार्च 2026 में हुए हमलों का पूरा ब्यौरा

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे महीने इलाके में संघर्ष की स्थिति बनी रही। इस संघर्ष के दौरान हुए प्रमुख घटनाक्रमों की सूची नीचे दी गई है:

तारीख घटना का विवरण
1 मार्च 2026 हमले में आर्मी सार्जेंट बेंजामिन एन. पेनिंगटन की मौत हुई।
6 मार्च 2026 सऊदी अरब ने 3 बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया।
25 मार्च 2026 CENTCOM ने ईरान के उत्पादन ठिकानों के नष्ट होने का दावा किया।
27 मार्च 2026 ताजा हमले में 10 सैनिक घायल और विमानों को नुकसान पहुंचा।

अमेरिकी सरकार और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

इस ताजा हमले से ठीक एक दिन पहले अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान को लेकर बड़े दावे किए गए थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 26 मार्च को कहा था कि ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी ईरान की सेना को बेअसर करने की बात कही थी। हालांकि, शुक्रवार को हुए इस हमले ने सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में इज़राइल ने भी चेतावनी दी है कि वह ईरान पर अपने हमलों का दायरा और बढ़ाएगा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ईरान के परमाणु संयंत्रों को हुए नुकसान की जांच में जुटी है।