सऊदी अरब में पढ़ने वाले बच्चों और उनके माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर आई है। अब कोई भी प्राइवेट या इंटरनेशनल स्कूल फीस बकाया होने की वजह से बच्चों के सर्टिफिकेट नहीं रोक पाएगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि पैसों के झगड़े की वजह से किसी बच्चे की पढ़ाई और उसका भविष्य नहीं रुकना चाहिए।
सऊदी अरब के शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) ने एक औपचारिक निर्देश जारी किया है। इस नियम के मुताबिक, स्कूल अब बकाया फीस के कारण छात्रों के एकेडमिक सर्टिफिकेट, ट्रांसक्रिप्ट या ग्रेजुएशन के दस्तावेज़ रोकने या उनमें देरी करने का अधिकार नहीं रखते हैं। यह फैसला सऊदी अरब में चल रहे सभी प्राइवेट और इंटरनेशनल स्कूलों पर लागू होगा।
यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि परिवारों और स्कूल प्रशासन के बीच पैसों के विवाद का असर छात्र की पढ़ाई पर न पड़े। मंत्रालय का मानना है कि अगर स्कूल को फीस लेनी है, तो वह इसके लिए कानूनी रास्ता अपना सकते हैं, लेकिन छात्रों के दस्तावेज़ों को बंधक नहीं बना सकते।
इस मामले में शिक्षा मंत्रालय काफी समय से सख्त है। साल 2013 में भी मंत्रालय ने चेतावनी दी थी कि सर्टिफिकेट रोकना नियमों के खिलाफ है। उस समय रिपोर्ट आई थी कि करीब 60,000 सर्टिफिकेट फीस न भरने की वजह से स्कूलों ने रोक रखे थे। इसके बाद मंत्रालय ने बार-बार निर्देश दिए कि बकाया राशि की वसूली के लिए अन्य कानूनी माध्यमों का इस्तेमाल किया जाए।
सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह खबर बहुत जरूरी है, क्योंकि बहुत से भारतीय परिवार अपने बच्चों को यहीं के इंटरनेशनल स्कूलों में पढ़ाते हैं। अब उन्हें यह भरोसा रहेगा कि किसी भी वित्तीय विवाद की स्थिति में उनके बच्चों के ज़रूरी कागजात सुरक्षित रहेंगे और उनकी अगली पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आएगी।
साल 2023 के नियमों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय अब स्वीकृत फीस सूची भी जारी करता है ताकि विवादों को सुलझाया जा सके। जो स्कूल इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन पर प्राइवेट स्कूलों के नियमों के तहत जुर्माना और पेनल्टी लगाई जाएगी।
