सऊदी अरब के Qassim इलाके में खेती के तरीके में बड़ा बदलाव आया है. यहाँ अब आधुनिक तकनीक की मदद से स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसी फलियां उगाई जा रही हैं. सरकार का मुख्य लक्ष्य देश में खाद्य सुरक्षा बढ़ाना और बाहर के देशों से आने वाले आयात को कम करना है ताकि स्थानीय स्तर पर जरूरतें पूरी हो सकें.

खेती के लिए कौन सी नई तकनीक का इस्तेमाल हुआ है

Qassim के किसानों ने यहाँ हाइड्रोपोनिक खेती को अपनाया है, जिसमें मिट्टी के बिना पौधों को उगाया जाता है. इसमें 7 लेवल तक ऊँचे वर्टिकल फार्मिंग टावर लगाए गए हैं और सिंचाई के लिए ऊपर से नीचे की ओर पानी डालने वाले सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है. इस तकनीक में ज्वालामुखी चट्टानों (volcanic rock) का इस्तेमाल किया गया है और ऑर्गेनिक खाद व कीटनाशकों पर जोर दिया गया है.

इस आधुनिक खेती से क्या बड़े फायदे हुए हैं

नई तकनीक के आने से खेती की लागत और संसाधनों की बचत हुई है. इससे न केवल उत्पादन बढ़ा है बल्कि पर्यावरण को भी फायदा पहुँचा है. इस बदलाव से जुड़े कुछ मुख्य आंकड़े नीचे दी गई टेबल में देखे जा सकते हैं:

विवरण फायदा/बदलाव
पानी की बचत पारंपरिक खेती के मुकाबले 80% कम पानी का उपयोग
उत्पादन क्षमता 360 वर्ग मीटर के ग्रीनहाउस में लगभग 9,000 पौधे
कृषि जीडीपी ग्रोथ पिछले चार वर्षों में 35% की बढ़ोतरी

खाद्य सुरक्षा और सरकारी पहल का क्या असर होगा

पर्यावरण, जल और कृषि मंत्री Eng. Abdulrahman AlFadley ने बताया कि खाद्य सुरक्षा के लिए लंबे समय तक चलने वाले बदलावों की जरूरत है. इसी दिशा में ‘Qassim Land’ पहल शुरू की गई है, जिसके संरक्षक प्रिंस डॉ. फैसल बिन मिशाल बिन अब्दुलअजीज अल सऊद हैं. यह पूरा प्रोजेक्ट सऊदी विजन 2030 का हिस्सा है, जिसका मकसद प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करना और देश को आत्मनिर्भर बनाना है.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.