सऊदी अरब ने एक बार फिर दुनिया को साफ कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पूरी तरह साथ है। न्यूयॉर्क में हुई एक बड़ी मीटिंग में सऊदी ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ मिलकर काम करने का वादा किया। सऊदी अरब के प्रतिनिधि डॉ अब्दुलअजीज अल-वासेल ने कहा कि आतंकवाद पूरी दुनिया की शांति और सुरक्षा के लिए एक सीधा खतरा है।

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आतंकवाद के खिलाफ सऊदी अरब का क्या प्लान है?

सऊदी अरब ने आतंकवाद से निपटने के लिए कई जरूरी बातें कहीं हैं। उन्होंने बताया कि अब आतंकवादी संगठन लोगों को भड़काने और पैसा जुटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे रोकना बहुत जरूरी है। सऊदी अरब ने यह भी कहा कि अफ्रीका में आतंकवाद का असर सबसे ज्यादा है, इसलिए वहां अंतरराष्ट्रीय मदद और तालमेल बढ़ाना होगा। इसके साथ ही उन्होंने माली के बामाको में हुए आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की।

UN के साथ सऊदी अरब का रिश्ता और योगदान

सऊदी अरब लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में UN की मदद कर रहा है। इसके कुछ मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • UNCCT की मदद: सऊदी अरब 2011 से UN काउंटर टेररिज्म सेंटर (UNCCT) का संस्थापक सदस्य और सलाहकार बोर्ड का अध्यक्ष है।
  • सबसे बड़ा योगदान: आतंकवाद से लड़ने के लिए बने UN ट्रस्ट फंड में सऊदी अरब सबसे ज्यादा पैसा देने वाला देश है।
  • पूरी रणनीति: सऊदी सिर्फ सुरक्षा और हथियारों पर जोर नहीं दे रहा, बल्कि वह लोगों में सहनशीलता और उदारता फैलाकर आतंकवाद की वैचारिक जड़ों को खत्म करना चाहता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सऊदी अरब UN काउंटर टेररिज्म सेंटर की मदद कब से कर रहा है

सऊदी अरब साल 2011 से इस सेंटर का संस्थापक सदस्य और सलाहकार बोर्ड का अध्यक्ष है।

सऊदी अरब ने आतंकवाद के किन नए खतरों के बारे में चेतावनी दी है

सऊदी अरब ने बताया कि आतंकवादी अब भर्ती, फंडिंग और दुष्प्रचार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।