सऊदी अरब की सरकार ने 21 जुलाई 2026 को यमन और वहां की वैध सरकार को अपना समर्थन जारी रखने का ऐलान किया है। सऊदी कैबिनेट ने स्पष्ट किया है कि लाल सागर के बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और अपनी जहाजों की रक्षा के लिए वह हर संभव कदम उठाएगी। यह बयान हूतियों द्वारा किए गए उस दावे के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की बात कही थी।
सऊदी अरब का कड़ा रुख
सऊदी विदेश मंत्रालय ने हूतियों के दावों को पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद बताया है। मंत्रालय के अनुसार, सऊदी अरब लगातार यमन के लोगों की मदद कर रहा है और 2026 की पहली छमाही में ही 300 से अधिक जहाज उत्तरी यमन के बंदरगाहों पर जरूरी सामान लेकर पहुंचे हैं। इन जहाजों में भोजन और ईंधन जैसी बुनियादी जरूरतें शामिल थीं।
गठबंधन सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने पुष्टि की है कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में गठबंधन के जहाजों की सुरक्षा के लिए ठोस उपाय लागू कर दिए गए हैं। सऊदी अधिकारियों ने हूतियों पर यमन के आर्थिक संकट को और गहरा करने का आरोप लगाया है।
क्षेत्रीय देशों का समर्थन
यमन की सरकार ने सऊदी अरब के इस कदम का स्वागत किया है। यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष रशाद अल-अलीमी ने देश से तेल निर्यात को फिर से शुरू करने की घोषणा की है। वहीं, कुवैत और कतर ने भी सऊदी अरब के साथ एकजुटता दिखाई है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्र में आवाजाही की आजादी को महत्वपूर्ण बताया है। हूतियों के इन बयानों के बीच यह भी साफ हो गया है कि सऊदी अरब और हूतियों के बीच चल रही सीधी बातचीत रुक गई है।
