सऊदी अरब अब दुनिया भर की बड़ी कंपनियों के लिए पसंदीदा जगह बन गया है। विज़न 2030 के तहत देश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की कोशिशें रंग लाई हैं। अब तक 700 से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने सऊदी अरब में अपने क्षेत्रीय मुख्यालय (RHQ) खोल लिए हैं।

सऊदी अरब ने विज़न 2030 का लक्ष्य समय से पहले कैसे पूरा किया?

इन्वेस्टमेंट मिनिस्टर इंजीनियर खालिद अल-फालिह और असिस्टेंट मिनिस्टर अब्दुल्ला अल-दुबाइखी ने जनवरी 2026 में जानकारी दी कि सऊदी अरब ने विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के अपने लक्ष्य को पार कर लिया है। विज़न 2030 के तहत शुरुआती लक्ष्य 500 कंपनियों का था, लेकिन अब यह संख्या 700 के पार पहुँच गई है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की संख्या भी 6,000 से ज़्यादा हो गई है।

विदेशी कंपनियों को सऊदी अरब में क्या फायदे मिल रहे हैं?

कंपनियों को आकर्षित करने के लिए सऊदी सरकार ने टैक्स में बड़ी छूट दी है। इसके लिए ज़कात, टैक्स और कस्टम्स अथॉरिटी (ZATCA) ने नियम बनाए हैं। मुख्य फायदे और शर्तें नीचे दी गई हैं:

  • टैक्स छूट: लाइसेंस पाने वाली कंपनियों को 30 साल तक कॉर्पोरेट इनकम टैक्स और विथहोल्डिंग टैक्स में 0% टैक्स का लाभ मिलेगा।
  • ऑफिस की शर्त: कंपनियों के पास वैध लाइसेंस होना चाहिए और सऊदी अरब में अपना ऑफिस होना ज़रूरी है।
  • स्टाफ और काम: कंपनियों को यहाँ योग्य स्टाफ रखना होगा और क्षेत्रीय रणनीति, बजट प्लानिंग और मार्केट रिसर्च जैसे काम सऊदी अरब से ही करने होंगे।

सरकारी ठेकों के नियमों में क्या बदलाव हुआ है?

1 जनवरी 2024 से यह नियम लागू था कि विदेशी कंपनियां तभी सरकारी ठेका ले सकेंगी जब उनका क्षेत्रीय मुख्यालय सऊदी अरब में हो। लेकिन फरवरी 2026 में सरकार ने इसमें कुछ ढील दी है। अब कुछ खास स्थितियों में बिना मुख्यालय वाली कंपनियों को भी ठेका मिल सकता है:

  • अगर प्रोजेक्ट की अनुमानित कीमत 10 लाख सऊदी रियाल से कम है।
  • अगर किसी कंपनी की बोली दूसरी सबसे अच्छी बोली से कम से कम 25% सस्ती है।
  • अगर केवल एक ही कंपनी तकनीकी रूप से सही पाई गई है।

इन छूट के लिए कंपनियों को ‘एतिमाद’ (Etimad) डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए आवेदन करना होगा।