सऊदी अरब ने हूती मिलिशिया के उन सभी दावों को पूरी तरह से नकार दिया है जिसमें उन्होंने सऊदी अरब पर यमनी लोगों की घेराबंदी करने का आरोप लगाया था। सऊदी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि हूती गुट द्वारा लगाए गए ये आरोप पूरी तरह से गलत हैं और इनका मकसद केवल अपनी आर्थिक मुश्किलों से जनता का ध्यान भटकाना है। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत समुद्री जहाजों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।
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यमनी लोगों की मदद के लिए सऊदी की प्रतिबद्धता
मंत्रालय ने बताया कि वे यमन की वैध सरकार के साथ मिलकर लंबे समय से यमन में विकास परियोजनाओं और बिजली संयंत्रों के लिए ईंधन मुहैया कराने का काम कर रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही के दौरान यमन के होदेइदाह, अल सालिफ और रास इस्सा बंदरगाहों पर 300 से ज्यादा व्यावसायिक जहाज पहुंचे हैं, जो भोजन, ईंधन और निर्माण सामग्री लेकर आए थे। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2216 के तहत हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए निगरानी का काम जारी है।
हूती गुट पर हमलों का आरोप
सऊदी विदेश मंत्रालय ने हूती गुट के पुराने हमलों की याद दिलाते हुए कहा कि इन्होंने अदन एयरपोर्ट, तेल टर्मिनलों और लाल सागर में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया है। साथ ही सनामा एयरपोर्ट पर यमेनिया एयरवेज के चार विमानों को जब्त करने जैसी घटनाओं से यमन में मानवीय स्थिति और खराब हुई है। सऊदी अरब ने दोहराया है कि वे संयुक्त राष्ट्र की शांति योजना के समर्थन में हैं, जिसे यमन की सरकार ने स्वीकार कर लिया है लेकिन हूतियों ने इसे ठुकरा दिया। अंत में सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से प्रस्ताव 2216 और 2722 को सख्ती से लागू करने की अपील की है ताकि लाल सागर में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे।
