सऊदी अरब ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रबंधन के लिए किसी भी नए समझौते या नियमों को मानने से साफ इनकार कर दिया है। सऊदी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के लिए किसी भी नए इंतजाम या तंत्र का समर्थन नहीं करेगा। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

सऊदी अरब का यह बयान 17 जून 2026 को आया। इससे पहले 15 जून को सऊदी अरब ने अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य अभियान रोकने और विस्तृत बातचीत शुरू करने के समझौते का स्वागत किया था। उस समय सऊदी ने जोर दिया था कि इस जलमार्ग की सुरक्षा और जहाजों के आने-जाने की आजादी वैसी ही होनी चाहिए, जैसी 28 फरवरी से पहले थी।

16 जून को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में भी इसी बात को दोहराया गया। सरकार ने साफ कहा कि Strait of Hormuz में जहाजों के आने-जाने की आजादी को युद्ध से पहले वाली स्थिति में लाना बहुत जरूरी है।

ईरान की कोशिशों और सुरक्षा पर चिंता

विश्लेषण के मुताबिक, ईरान अमेरिका के साथ हुए MOU (समझौते) की अस्पष्ट भाषा का फायदा उठाकर जलमार्ग पर अपना नियंत्रण बढ़ा सकता है। इसमें जहाजों के लिए अपने ट्रैफिक नियमों को थोपना या IRGC Navy के जरिए फीस वसूलना शामिल हो सकता है। सऊदी अरब इसी वजह से किसी भी नए इंतजाम का विरोध कर रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की सप्लाई पर कोई बुरा असर न पड़े।

सऊदी अरब का मानना है कि समुद्र में जहाजों की आवाजाही की आजादी एक बुनियादी सिद्धांत है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुरक्षित रखा जाना चाहिए और इसका सम्मान होना चाहिए।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.