सऊदी अरब अब अपनी बिजली जरूरतों के लिए सिर्फ तेल पर निर्भर नहीं रहना चाहता है। Ministry of Energy ने बताया कि देश की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता अब 64 GW तक पहुंच गई है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा सिर्फ साल 2025 में ही जोड़ा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में बिजली का बड़ा हिस्सा प्राकृतिक स्रोतों से आए ताकि पर्यावरण को फायदा हो और ऊर्जा के नए विकल्प मिलें।
सऊदी अरब की रिन्यूएबल एनर्जी का ताजा हिसाब क्या है?
Ministry of Energy द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब ने अपनी रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में भारी बढ़त की है। फिलहाल 12.3 GW प्रोजेक्ट्स नेशनल ग्रिड से जुड़ चुके हैं और काम कर रहे हैं। इसके साथ ही बिजली को स्टोर करने के लिए बैटरी स्टोरेज पर भी काम चल रहा है, ताकि जब धूप या हवा न हो तब भी बिजली मिल सके।
| विवरण | आंकड़ा/क्षमता |
|---|---|
| कुल लॉन्च की गई क्षमता | 64 GW |
| साल 2025 में लॉन्च प्रोजेक्ट्स | 20.6 GW |
| ग्रिड से जुड़ी चालू क्षमता | 12.3 GW |
| बैटरी स्टोरेज लॉन्च क्षमता | 30 GWh |
| ग्रिड से जुड़ा बैटरी स्टोरेज | 8 GWh |
| 2030 तक का लक्ष्य | 130 GW |
बैटरी स्टोरेज और नए प्रोजेक्ट्स की क्या योजना है?
Saudi Power Procurement Company (SPPC) ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के दूसरे ग्रुप के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत 6 नए प्रोजेक्ट्स आएंगे जो कुल 3,000 MW की क्षमता और 12,000 MWh स्टोरेज जोड़ेंगे। ये प्रोजेक्ट्स Samha (Qassim), Al-Lith और Khulais (Makkah), Al-Henakiyah (Madinah), Al-Saddawi (Eastern Province) और Ashirah (Makkah) में लगाए जाएंगे। ये सभी प्रोजेक्ट्स Build-Own-Operate मॉडल पर काम करेंगे।
इन्वेस्टमेंट और नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा?
सऊदी अरब की इस कोशिश से दुनिया भर के निवेशकों का ध्यान इस तरफ गया है और अब तक लगभग 10 अरब डॉलर का निवेश आया है। इस वजह से सऊदी अरब अब दुनिया का दसवां सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर बन गया है। सरकार का मानना है कि इस पूरे सेक्टर के बढ़ने से साल 2030 तक करीब 7,50,000 नई नौकरियां पैदा होंगी। यह सब Saudi Vision 2030 का हिस्सा है, जिसके तहत 2030 तक देश की 50% बिजली रिन्यूएबल एनर्जी से बनाने का लक्ष्य रखा गया है।