सऊदी अरब के असीर क्षेत्र में एक बेहद खास ऐतिहासिक धरोहर को फिर से आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। करीब 1300 साल पुरानी अल-मस्की मस्जिद (Al-Masqi Mosque) का काम पूरा हो गया है और अब यहाँ दोबारा नमाज़ पढ़ी जा सकेगी। यह मस्जिद असीर इलाके में अबहा से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के ऐतिहासिक मस्जिदों के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट के तहत इसे तैयार किया गया है।

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मस्जिद को पुराने अंदाज़ में कैसे तैयार किया गया है?

इस मस्जिद को ठीक करते समय इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि इसकी पुरानी पहचान न खोए। इसे ‘सरात शैली’ (Sarat style) में बनाया गया है, जो इस पहाड़ी इलाके की खासियत है। मस्जिद को बनाने में आस-पास के पहाड़ों से लाए गए पत्थरों और स्थानीय लकड़ियों का ही इस्तेमाल हुआ है।

इंजीनियरों ने यहाँ की दीवारों को पत्थर और मिट्टी से मज़बूत करने वाले ‘मदामिक सिस्टम’ का उपयोग किया है। इसके अलावा, बारिश से बचाने के लिए पत्थरों की खास परतों का इस्तेमाल हुआ है। मस्जिद की एक बड़ी खासियत इसकी मीनार है, जिसकी ऊंचाई करीब 12.7 मीटर है और इसे भी सुरक्षित रखा गया है।

नमाज़ियों के लिए अब क्या इंतज़ाम है?

मरम्मत के बाद अल-मस्की मस्जिद का कुल क्षेत्रफल अब 405.72 वर्ग मीटर हो गया है। अब यहाँ एक साथ 156 नमाज़ी इबादत कर सकते हैं। यह मस्जिद अब रोज़ाना की नमाज़ और जुमे की नमाज़ के लिए पूरी तरह से खुली है।

इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ इमारत को ठीक करना नहीं था, बल्कि इसे दोबारा आबाद करना था। यह क्राउन प्रिंस के उस बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसके तहत सऊदी अरब के 13 अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 130 ऐतिहासिक मस्जिदों को सुधारा जा रहा है। इसमें महिलाओं के लिए नमाज़ की जगह और ज़रूरी सेवाओं को भी बेहतर बनाया गया है, ताकि लोग आसानी से अपनी धार्मिक ज़िम्मेदारियां पूरी कर सकें।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.