सऊदी अरब ने एक बार फिर दुनिया में अपनी बड़ी भूमिका निभाई है। विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने बताया कि उन्होंने अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए पर्दे के पीछे से काफी मेहनत की। इस कोशिश का नतीजा है कि अब दोनों देशों के बीच सैन्य हमले रुकेंगे और शांति की बात होगी।

🗞️: Saudi-Iran Relations: सऊदी अरब और ईरान के रिश्तों में आई गिरावट, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने बताया आगे का प्लान

प्रिंस फैसल बिन फरहान ने ऑस्ट्रिया के विएना में एक मीटिंग के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब चाहता है कि क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाया जाए और परमाणु समझौते पर कड़ी निगरानी रखी जाए। उनके मुताबिक, जब तक इलाके के पुराने विवाद खत्म नहीं होंगे, कोई भी समझौता पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहेगा।

15 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता हुआ। इसके तहत दोनों देशों ने सैन्य ऑपरेशन बंद करने का फैसला किया है। अब अगले 60 दिनों के भीतर एक स्थायी समझौते के लिए विस्तृत बातचीत शुरू होगी।

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में हुई सऊदी कैबिनेट की बैठक में इस समझौते का स्वागत किया गया। सऊदी सरकार ने इस काम में पाकिस्तान और कतर द्वारा की गई मध्यस्थता की भी तारीफ की।

एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर भी साइन हुए हैं, जिसकी खास बातें नीचे दी गई हैं:

  • Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू होगी।
  • अमेरिका द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी को तुरंत हटाया जाएगा।
  • लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्धविराम लागू होगा।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने सऊदी अरब के इस योगदान की सराहना की है। उन्होंने माना कि सऊदी अरब की कोशिशों से क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बढ़ेगी। अब इस शांति समझौते पर आधिकारिक तौर पर 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com