सऊदी अरब में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए बनाए गए नकली वीडियो और आवाज यानी डीपफेक पर लगाम कसी जाएगी। सऊदी डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अथॉरिटी (SADAYA) ने इसके लिए एक नया गाइडलाइन डॉक्यूमेंट जारी किया है। इस पहल का मकसद लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और गलत जानकारी से बचाना है ताकि समाज में सुरक्षा बनी रहे।
डीपफेक क्या है और इससे आम लोगों को क्या खतरा है?
SADAYA ने अपने दस्तावेज़ में बताया कि डीपफेक एक ऐसी तकनीक है जिसमें डीप लर्निंग का इस्तेमाल करके ऑडियो, फोटो या वीडियो को इस तरह बदला जाता है कि वह बिल्कुल असली लगे। इसके गलत इस्तेमाल से कई गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं:
- वित्तीय धोखाधड़ी: नकली आवाज या वीडियो के जरिए पैसे ठगने की कोशिश की जा सकती है।
- गलत जानकारी: समाज में अफवाहें फैलाकर लोगों को गुमराह किया जा सकता है।
- निजता का हनन: किसी की अनुमति के बिना उसकी फोटो या आवाज का इस्तेमाल कर उसकी छवि खराब की जा सकती है।
हालांकि, सरकार ने यह भी माना कि अगर इसका सही इस्तेमाल हो तो यह शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन के क्षेत्र में मददगार साबित होगा।
नकली कंटेंट को रोकने के लिए सरकार ने क्या नियम बनाए हैं?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब कंटेंट बनाने वालों और डेवलपर्स को नैतिक नियमों का पालन करना होगा। इसके लिए कुछ मुख्य बातें तय की गई हैं:
- इजाजत जरूरी: किसी भी व्यक्ति की आवाज, फोटो या डेटा का इस्तेमाल करने से पहले उसकी लिखित सहमति लेना अनिवार्य होगा।
- तकनीकी पहचान: नकली कंटेंट की पहचान के लिए डिजिटल वॉटरमार्क और सोर्स वेरिफिकेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
- निगरानी सिस्टम: सरकार लगातार ऐसी प्रणालियों पर नजर रखेगी जो AI का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।
‘Year of AI 2026’ के तहत क्या खास बदलाव होंगे?
सऊदी कैबिनेट ने मार्च 2026 में साल 2026 को ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का साल’ घोषित किया था। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए SADAYA ने एक विस्तृत गाइड जारी की है ताकि पूरे देश में AI के प्रति जागरूकता बढ़े। सऊदी अरब अब दुनिया भर में AI सुरक्षा के लिए नियम बनाने में मदद कर रहा है और इसके लिए UNESCO और ICAIRE जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है। यह पूरी योजना क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के विज़न 2030 का हिस्सा है ताकि सऊदी अरब डेटा और AI के क्षेत्र में ग्लोबल हब बन सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
डीपफेक क्या होता है?
यह AI से तैयार किया गया ऐसा नकली मीडिया है जिसमें ऑडियो, इमेज या वीडियो को इस तरह बदला जाता है कि वह असली इंसान जैसा दिखे या सुनाई दे।
सऊदी सरकार ने डीपफेक को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने ‘डीपफेक प्रिंसिपल्स डॉक्यूमेंट’ जारी किया है, जिसमें डिजिटल वॉटरमार्किंग, अनिवार्य सहमति और सख्त निगरानी नियमों को लागू करने की बात कही गई है।
Year of Artificial Intelligence 2026 क्या है?
सऊदी कैबिनेट ने 2026 को AI का साल घोषित किया है ताकि देश में इस तकनीक के सही इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सके और लोगों को इसके खतरों के प्रति जागरूक किया जा सके।