सऊदी अरब में काम करने वाले प्रवासियों के लिए एक बड़ी खबर है। अगर कंपनी सैलरी देने में देरी करती है, तो अब वर्कर्स को परेशान होने की जरूरत नहीं है। मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय (MHRSD) ने ऐसे नियम बनाए हैं जिनसे वर्कर्स अपना बकाया पैसा आसानी से वसूल कर सकते हैं। यह कदम वर्कर्स के अधिकारों को सुरक्षित करने और डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

🚨: Kuwait Customs: फ्रोजन चिकन में छिपाकर लाया जा रहा था ड्रग्स, एयरपोर्ट पर पकड़ा गया बड़ा जखीरा

सैलरी रोकने पर क्या है कानून

सऊदी लेबर कानून के मुताबिक सैलरी में देरी करना पूरी तरह गैरकानूनी है। सभी कंपनियों के लिए यह जरूरी है कि वे हर महीने समय पर बैंक के जरिए सैलरी का भुगतान करें। कंपनी अगर घाटे में है या उसे कोई अंदरूनी समस्या है, तो भी सैलरी रोकना कानूनी रूप से मान्य नहीं है। अब सरकार इसके लिए शिकायत का इंतजार नहीं करती, बल्कि डिजिटल सिस्टम से खुद निगरानी रखती है।

डिजिटल निगरानी और नए प्लेटफॉर्म

सरकार ने Wage Protection System (WPS) और Mudad जैसे सिस्टम लागू किए हैं। ये प्लेटफॉर्म अपने आप ट्रैक करते हैं कि किस कंपनी ने सैलरी नहीं दी है। जब भी कोई गड़बड़ी होती है, तो सिस्टम खुद ही अलर्ट जारी कर देता है। इसके अलावा, Qiwa प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कॉन्ट्रैक्ट के दस्तावेजीकरण और शिकायतों के लिए किया जा रहा है।

यूनिफाइड कॉन्ट्रैक्ट और Najiz पोर्टल

एक बड़ा बदलाव ‘यूनिफाइड एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट’ के रूप में आया है। अब एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट को कानूनी तौर पर लागू करना आसान हो गया है। वर्कर्स अब सीधे Najiz प्लेटफॉर्म के जरिए एनफोर्समेंट कोर्ट में आवेदन कर सकते हैं। इससे उन्हें लंबे समय तक लेबर कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और पैसा जल्दी मिल सकेगा।

नियम लागू होने की समय सीमा

समय सीमा किस पर लागू होगा
अक्टूबर 2025 नए या अपडेट किए गए कॉन्ट्रैक्ट पर
मार्च 2026 रिन्यू होने वाले फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर
अगस्त 2026 सभी ओपन-एंडेड या अनिश्चित कॉन्ट्रैक्ट पर

सैलरी न मिलने पर वर्कर्स क्या करें

  • सबूत जमा करें: अपना कॉन्ट्रैक्ट, बैंक स्टेटमेंट और कंपनी से हुई बातचीत का रिकॉर्ड रखें।
  • लिखित मांग: कंपनी के HR विभाग को ईमेल या पत्र लिखकर सैलरी की मांग करें।
  • शिकायत दर्ज करें: अगर कॉन्ट्रैक्ट रजिस्टर्ड है, तो Najiz पोर्टल पर अर्जी दें या Qiwa के जरिए शिकायत करें।
  • मीटिंग में हिस्सा लें: MHRSD दोनों पक्षों के बीच सुलह के लिए मीटिंग बुलाएगा, जिसमें शामिल होना जरूरी है।
  • कोर्ट की कार्रवाई: अगर सुलह नहीं होती, तो मामला लेबर कोर्ट में जाएगा।

कंपनियों पर जुर्माना और नौकरी बदलने का अधिकार

सैलरी में देरी करने वाली कंपनियों के लिए कड़े नियम हैं। अगर दो महीने तक सैलरी नहीं दी जाती, तो MHRSD की सेवाएं कंपनी के लिए बंद कर दी जाएंगी। तीन महीने की देरी होने पर वर्कर्स को यह अधिकार मिल जाता है कि वे बिना कंपनी की सहमति के दूसरी कंपनी में अपना ट्रांसफर करा सकें। इसके अलावा, प्रवासियों के लिए एक वेज इंश्योरेंस सर्विस भी शुरू की गई है, जो लंबे समय तक सैलरी न मिलने या कंपनी के डिफॉल्ट होने पर आर्थिक मदद और घर लौटने का टिकट उपलब्ध कराती है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.