सऊदी अरब और दक्षिण कोरिया के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर एक अहम बैठक हुई है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ कांग हून-सिक ने रियाद का दौरा किया। इस मुलाकात का मुख्य मकसद मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच तेल और नेफ्था की सप्लाई को सुरक्षित करना था ताकि उनकी अर्थव्यवस्था पर असर न पड़े।

दक्षिण कोरिया को तेल की इतनी चिंता क्यों है?

दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था तेल और नेफ्था के आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है। पिछले साल उनके 60% से ज्यादा कच्चे तेल और आधे से ज्यादा नेफ्था की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए हुई थी। इस इलाके में अस्थिरता के कारण सप्लाई रुकने का खतरा बना रहता है, इसलिए कोरिया अब वैकल्पिक रास्तों और पुख्ता इंतजामों की तलाश कर रहा है।

बैठक में किन बातों पर चर्चा हुई?

12 अप्रैल 2026 को रियाद में सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान बिन अब्दुल्ला ने कांग हून-सिक से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर बातचीत हुई। इस प्रतिनिधिमंडल में दक्षिण कोरियाई ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों और बड़ी एनर्जी कंपनियों के लोग भी शामिल थे।

तेल सप्लाई के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए?

दक्षिण कोरिया ने केवल सऊदी अरब ही नहीं, बल्कि अन्य देशों से भी संपर्क साधा है। इस संबंध में मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • UAE के साथ डील: कोरिया ने पिछले महीने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से 24 मिलियन बैरल कच्चे तेल लेने का समझौता किया था।
  • सप्लाई स्टेटस: UAE से यह तेल धीरे-धीरे कोरियाई बंदरगाहों पर पहुंच रहा है।
  • रणनीतिक दौरा: कांग हून-सिक ने सऊदी अरब के अलावा कजाकिस्तान और ओमान का भी दौरा किया।
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.