मिडल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव को लेकर सऊदी अरब ने गहरी चिंता जताई है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इस मामले में शांति बनाए रखने और तनाव कम करने की अपील की है। सऊदी सरकार चाहती है कि इस झगड़े का राजनीतिक हल निकले ताकि पूरे इलाके की सुरक्षा खतरे में न पड़े। इसके लिए सऊदी अरब ने पाकिस्तान की मध्यस्थता और कूटनीतिक कोशिशों का पूरा समर्थन किया है।

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सऊदी अरब क्यों है चिंतित और पाकिस्तान की क्या भूमिका है?

सऊदी अरब को डर है कि अगर सैन्य तनाव और बढ़ा तो इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता खत्म हो जाएगी। इस समस्या को सुलझाने के लिए सऊदी अरब ने पाकिस्तान पर भरोसा जताया है क्योंकि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में अहम भूमिका निभा रहा है। बता दें कि 17 सितंबर 2025 को सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता (SMDA) भी साइन किया था। सऊदी सरकार का मानना है कि पाकिस्तान की मदद से एक स्थायी समझौता हो सकता है जिससे युद्ध की नौबत नहीं आएगी।

Strait of Hormuz में क्या समस्या है और सऊदी की मांग क्या है?

  • नेविगेशन की बहाली: सऊदी अरब ने मांग की है कि Strait of Hormuz में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के आने-जाने की आजादी को फिर से वैसा ही कर दिया जाए जैसा 28 फरवरी से पहले था।
  • वैश्विक व्यापार पर असर: सऊदी अरब के यूएन प्रतिनिधि अब्दुलअजीज अल-वासेल ने 27 और 28 अप्रैल 2026 को सुरक्षा परिषद को चेतावनी दी कि अगर यहाँ रास्ता बंद रहा तो दुनिया के व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा खतरा होगा।
  • ईरान और अमेरिका पर रुख: सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरान के हमलों की निंदा करने को कहा है। साथ ही 14 अप्रैल 2026 को सऊदी ने अमेरिका से अपील की थी कि वह Strait of Hormuz की नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करे और ईरान के साथ बातचीत शुरू करे।
  • सुरक्षा की अपील: सऊदी विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि जहाजों का सुरक्षित रास्ता बिना किसी पाबंदी के खुला रहना चाहिए क्योंकि यह पूरी दुनिया के हित में है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सऊदी अरब ने Strait of Hormuz के लिए क्या मांग की है?

सऊदी अरब ने मांग की है कि 28 फरवरी से पहले जैसी स्थिति वापस आए और जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के सुरक्षित तरीके से चालू हो जाए।

इस मामले में पाकिस्तान का क्या काम है?

पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है ताकि राजनीतिक समाधान निकल सके और सैन्य तनाव को कम किया जा सके।