सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में सूडान की एकता और स्थिरता के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। सऊदी सरकार का कहना है कि सूडान में चल रहे झगड़े को खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना होगा। सऊदी ने साफ किया है कि सूडान के आंतरिक मामलों का समाधान वहां के लोग और राजनीतिक दल खुद तय करें।

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26 जून 2026 को UN में सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अब्दुलअज़ीज़ एम. अलवासिल ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि सूडान की संप्रभुता और उसकी सीमाओं को बचाए रखना बहुत जरूरी है। सऊदी अरब की प्राथमिकता है कि वहां तुरंत युद्धविराम हो और सरकारी संस्थाओं को सुरक्षित रखा जाए।

सऊदी अरब, मिस्र, यूएई और अमेरिका मिलकर एक ‘क्वाड’ समूह के तौर पर काम कर रहे हैं। इस समूह ने मांग की है कि सूडान में तुरंत मानवीय युद्धविराम लागू किया जाए। इससे राहत सामग्री बिना किसी रुकावट के जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सकेगी और आगे चलकर एक स्थायी शांति समझौता हो पाएगा।

सऊदी अरब और अमेरिका ने मई 2023 में ‘जेद्दा प्लेटफॉर्म’ की शुरुआत की थी। सऊदी का मानना है कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग विचारों के बीच दूरी कम की जा सकती है और राजनीतिक बातचीत फिर से शुरू की जा सकती है। UN के विशेष दूत पेक्का हाविस्टो ने भी कहा है कि 2023 का जेद्दा समझौता भविष्य की शांति वार्ता के लिए एक मजबूत आधार बन सकता है।

सऊदी सरकार ने अल फाशेर (El Fasher) शहर में हुए अपराधों और राहत सामग्री ले जा रहे काफिलों पर हमलों की कड़ी निंदा की है। सऊदी ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी ऐसे कदम का विरोध करेगा जिससे सूडान की एकता को नुकसान पहुंचे या वहां कोई समानांतर सरकार बनाने की कोशिश की जाए।

मदद के मामले में सऊदी अरब ने सूडान के साथ मजबूती से खड़ा रहने का वादा किया है। रिकॉर्ड के मुताबिक, 20 फरवरी 2026 तक सऊदी अरब ने सूडान के लोगों की मदद के लिए 3.1 बिलियन डॉलर की सहायता राशि दी है।