सऊदी अरब ने एक बार फिर सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया है। सऊदी सरकार चाहती है कि सीरिया एक स्थिर और सुरक्षित देश बने। हाल ही में सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीरिया के हक में अपनी आवाज़ बुलंद की है।

UN मीटिंग में सऊदी अरब की माँग

22 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) की एक मीटिंग हुई। इसमें सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि Abdulaziz Alwasil ने सीरिया की एकता और उसकी सीमाओं की सुरक्षा का समर्थन किया। सऊदी अरब ने अमेरिका से यह माँग की कि वह सीरिया को ‘आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों’ की लिस्ट से हटा दे।

सऊदी अरब का कहना है कि यह लिस्ट 1979 में पुराने शासन के समय बनाई गई थी, जो अब सीरिया की नई स्थिति से मेल नहीं खाती। इस लिस्ट की वजह से सीरिया की आर्थिक हालत सुधारने में मुश्किल आ रही है। साथ ही, सऊदी अरब ने इसराइल से माँग की कि वह सीरिया की ज़मीन से अपनी सेना को तुरंत हटा ले।

सीरिया की नई स्थिति और आर्थिक बदलाव

संयुक्त राष्ट्र ने माना है कि सीरिया में अब काफी सुधार हुआ है और वहां विदेशी निवेश बढ़ा है। आर्थिक पाबंदियों के हटने से वहां व्यापार में बड़ा बदलाव आया है। हालांकि, UN ने यह भी कहा कि इसराइल और Da’esh की हरकतों से यह सुधार खतरे में पड़ सकता है।

सीरिया के नए राष्ट्रपति Ahmed al-Sharaa ने साफ़ किया है कि वह लेबनान और इसराइल के बीच चल रहे झगड़े में सैन्य हस्तक्षेप नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वह लेबनान के साथ आर्थिक रिश्तों को बेहतर बनाने पर ज़्यादा ध्यान देंगे क्योंकि लेबनान की स्थिरता सीरिया के लिए भी ज़रूरी है।

सऊदी अरब का स्टैंड और प्रयास

  • पूर्ण समर्थन: सऊदी अरब हमेशा से सीरिया की सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करता रहा है।
  • बाहरी हस्तक्षेप का विरोध: सऊदी सरकार ने सीरिया के आंतरिक मामलों में बाहरी देशों के दखल की कड़ी निंदा की है।
  • इसराइल पर आपत्ति: सऊदी अरब ने सीरियाई ज़मीन पर इसराइली हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
  • पुनर्निर्माण में मदद: सऊदी अरब सीरिया को फिर से बसाने और वहां के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के प्रयासों का समर्थन कर रहा है।
  • पाबंदियों की समाप्ति: सऊदी अरब कूटनीतिक स्तर पर सीरिया से अंतरराष्ट्रीय पाबंदियां हटाने की कोशिशों में जुटा है।